2 जनवरी 2029 को कृष्णनगर का पंचांग

मंगलवार, 2 जनवरी 2029, कृष्णनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 जनवरी 2029 को कृष्णनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (19:06 तक), नक्षत्र पुष्य (02:44, 3 जन॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 14:21 से 15:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 17:02
रात 06:18 तक
तिथि
द्वितीया, 19:06 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 02:44 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जनवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 19:06 तक
कृष्ण तृतीया 17:03, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 02:44, 3 जन॰ तक
आश्लेषा 01:18, 4 जन॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:32 तक
विष्कंभअशुभ 15:38, 3 जन॰ तक
करण
तैतिल 08:02 तक
गर 19:06 तक
वणिज 06:06, 3 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:03, 3 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
18:49
चंद्रास्त
07:27
दिनमान
10h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
14:21 – 15:41
यमगंड
08:59 – 10:19
गुलिक काल
11:40 – 13:00

2 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:18 – 07:38टालें
उद्वेग07:38 – 08:59टालें
चर08:59 – 10:19सामान्य
लाभ10:19 – 11:40शुभ
अमृत11:40 – 13:00शुभ
काल13:00 – 14:21टालें
शुभ14:21 – 15:41शुभ
रोग15:41 – 17:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:02 – 18:41टालें
लाभ18:41 – 20:21शुभ
उद्वेग20:21 – 22:00टालें
शुभ22:00 – 23:40शुभ
अमृत23:40 – 01:19शुभ
चर01:19 – 02:59सामान्य
रोग02:59 – 04:38टालें
काल04:38 – 06:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1807:11दिन
सूर्य07:1108:05दिन
शुक्र08:0508:59दिन
बुध08:5909:52दिन
चंद्र09:5210:46दिन
शनि10:4611:40दिन
गुरु11:4012:33दिन
मंगल12:3313:27दिन
सूर्य13:2714:21दिन
शुक्र14:2115:14दिन
बुध15:1416:08दिन
चंद्र16:0817:02दिन
शनि17:0218:08रात
गुरु18:0819:14रात
मंगल19:1420:21रात
सूर्य20:2121:27रात
शुक्र21:2722:33रात
बुध22:3323:40रात
चंद्र23:4000:46रात
शनि00:4601:52रात
गुरु01:5202:59रात
मंगल02:5904:05रात
सूर्य04:0505:12रात
शुक्र05:1206:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कृष्णनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2622° (लाहिड़ी)। समय कृष्णनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।