20 सितंबर 2026 को कुरनूल का पंचांग

रविवार, 20 सितंबर 2026, कुरनूल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 सितंबर 2026 को कुरनूल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (17:51 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (04:34, 21 सित॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 16:44 से 18:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:15
रात 06:06 तक
तिथि
नवमी, 17:51 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 04:34 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 17:51 तक
शुक्ल दशमी 20:01, 21 सित॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 04:34, 21 सित॰ तक
उत्तराषाढ़ा 07:07, 22 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 15:22 तक
शोभन 16:05, 21 सित॰ तक
करण
कौलव 17:51 तक
तैतिल 06:59, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
13:54
चंद्रास्त
00:19
दिनमान
12h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
16:44 – 18:15
यमगंड
12:11 – 13:42
गुलिक काल
15:13 – 16:44

20 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:06 – 07:37टालें
चर07:37 – 09:08सामान्य
लाभ09:08 – 10:40शुभ
अमृत10:40 – 12:11शुभ
काल12:11 – 13:42टालें
शुभ13:42 – 15:13शुभ
रोग15:13 – 16:44टालें
उद्वेग16:44 – 18:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:15 – 19:44शुभ
अमृत19:44 – 21:13शुभ
चर21:13 – 22:42सामान्य
रोग22:42 – 00:11टालें
काल00:11 – 01:40टालें
लाभ01:40 – 03:09शुभ
उद्वेग03:09 – 04:37टालें
शुभ04:37 – 06:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0607:07दिन
शुक्र07:0708:08दिन
बुध08:0809:08दिन
चंद्र09:0810:09दिन
शनि10:0911:10दिन
गुरु11:1012:11दिन
मंगल12:1113:12दिन
सूर्य13:1214:12दिन
शुक्र14:1215:13दिन
बुध15:1316:14दिन
चंद्र16:1417:15दिन
शनि17:1518:15दिन
गुरु18:1519:15रात
मंगल19:1520:14रात
सूर्य20:1421:13रात
शुक्र21:1322:12रात
बुध22:1223:12रात
चंद्र23:1200:11रात
शनि00:1101:10रात
गुरु01:1002:09रात
मंगल02:0903:09रात
सूर्य03:0904:08रात
शुक्र04:0805:07रात
बुध05:0706:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां कुरनूल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2303° (लाहिड़ी)। समय कुरनूल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।