10 मार्च 2028 को कुरुक्षेत्र का पंचांग

शुक्रवार, 10 मार्च 2028, कुरुक्षेत्र, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 मार्च 2028 को कुरुक्षेत्र में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (10:21 तक), नक्षत्र मघा (09:28 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 11:04 से 12:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 18:27
रात 06:37 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:21 तक
पूर्णिमा, 06:36 तक
नक्षत्र
मघा, 09:28 तक
पूर्वा फाल्गुनी, 06:29 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 मार्च 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:21 तक
पूर्णिमा 06:36, 11 मार्च तक
कृष्ण प्रतिपदा 02:56, 12 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 09:28 तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:29, 11 मार्च तक
उत्तरा फाल्गुनी 03:37, 12 मार्च तक
योग
धृति 20:32 तक
शूलअशुभ 16:17, 11 मार्च तक
करण
वणिज 10:21 तक
विष्टि (भद्रा) 20:28 तक
बव 06:36, 11 मार्च तक
बालव 16:44, 11 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
17:52
चंद्रास्त
05:49
दिनमान
11h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
11:04 – 12:33
यमगंड
15:30 – 16:59
गुलिक काल
08:06 – 09:35

10 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:38 – 08:06सामान्य
लाभ08:06 – 09:35शुभ
अमृत09:35 – 11:04शुभ
काल11:04 – 12:33टालें
शुभ12:33 – 14:01शुभ
रोग14:01 – 15:30टालें
उद्वेग15:30 – 16:59टालें
चर16:59 – 18:27सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:27 – 19:59टालें
काल19:59 – 21:30टालें
लाभ21:30 – 23:01शुभ
उद्वेग23:01 – 00:32टालें
शुभ00:32 – 02:03शुभ
अमृत02:03 – 03:34शुभ
चर03:34 – 05:05सामान्य
रोग05:05 – 06:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3807:37दिन
बुध07:3708:36दिन
चंद्र08:3609:35दिन
शनि09:3510:34दिन
गुरु10:3411:33दिन
मंगल11:3312:33दिन
सूर्य12:3313:32दिन
शुक्र13:3214:31दिन
बुध14:3115:30दिन
चंद्र15:3016:29दिन
शनि16:2917:28दिन
गुरु17:2818:27दिन
मंगल18:2719:28रात
सूर्य19:2820:29रात
शुक्र20:2921:30रात
बुध21:3022:30रात
चंद्र22:3023:31रात
शनि23:3100:32रात
गुरु00:3201:33रात
मंगल01:3302:33रात
सूर्य02:3303:34रात
शुक्र03:3404:35रात
बुध04:3505:36रात
चंद्र05:3606:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कुरुक्षेत्र में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2508° (लाहिड़ी)। समय कुरुक्षेत्र (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।