कुवैत सिटी का आज का पंचांग

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026, कुवैत सिटी, Kuwait। समय Asia/Kuwait में है।

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को कुवैत सिटी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (00:55, 16 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (04:17, 16 अक्टू॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 12:59 से 14:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 17:18
रात 05:49 तक
तिथि
पंचमी, 00:55 तक
षष्ठी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 04:17 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 00:55, 16 अक्टू॰ तक
शुक्ल षष्ठी 03:24, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 04:17, 16 अक्टू॰ तक
मूल 07:17, 17 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 18:45 तक
शोभन 19:35, 16 अक्टू॰ तक
करण
बव 11:46 तक
बालव 00:55, 16 अक्टू॰ तक
कौलव 14:08, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 04:17, 16 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
10:14
चंद्रास्त
20:17
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
12:59 – 14:25
यमगंड
05:49 – 07:15
गुलिक काल
08:41 – 10:07

15 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:49 – 07:15शुभ
रोग07:15 – 08:41टालें
उद्वेग08:41 – 10:07टालें
चर10:07 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:59शुभ
अमृत12:59 – 14:25शुभ
काल14:25 – 15:51टालें
शुभ15:51 – 17:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:18 – 18:52शुभ
चर18:52 – 20:26सामान्य
रोग20:26 – 22:00टालें
काल22:00 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 04:15शुभ
अमृत04:15 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4906:46दिन
मंगल06:4607:44दिन
सूर्य07:4408:41दिन
शुक्र08:4109:38दिन
बुध09:3810:36दिन
चंद्र10:3611:33दिन
शनि11:3312:31दिन
गुरु12:3113:28दिन
मंगल13:2814:25दिन
सूर्य14:2515:23दिन
शुक्र15:2316:20दिन
बुध16:2017:18दिन
चंद्र17:1818:20रात
शनि18:2019:23रात
गुरु19:2320:26रात
मंगल20:2621:28रात
सूर्य21:2822:31रात
शुक्र22:3123:34रात
बुध23:3400:36रात
चंद्र00:3601:39रात
शनि01:3902:42रात
गुरु02:4203:44रात
मंगल03:4404:47रात
सूर्य04:4705:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कुवैत सिटी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2312° (लाहिड़ी)। समय कुवैत सिटी (Asia/Kuwait) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।