1 अक्टूबर 2029 को कुवैत सिटी का पंचांग

सोमवार, 1 अक्टूबर 2029, कुवैत सिटी, Kuwait। समय Asia/Kuwait में है।

सोमवार, 1 अक्टूबर 2029 को कुवैत सिटी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (12:23 तक), नक्षत्र आर्द्रा (11:59 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 07:10 से 08:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 17:33
रात 05:41 तक
तिथि
अष्टमी, 12:23 तक
नवमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 11:59 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 12:23 तक
कृष्ण नवमी 12:38, 2 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 12:52, 2 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 03:55, 2 अक्टू॰ तक
शिव 02:35, 3 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:23 तक
तैतिल 00:37, 2 अक्टू॰ तक
गर 12:38, 2 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
23:45
चंद्रास्त
13:00
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
07:10 – 08:39
यमगंड
10:08 – 11:37
गुलिक काल
13:06 – 14:35

1 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:41 – 07:10शुभ
काल07:10 – 08:39टालें
शुभ08:39 – 10:08शुभ
रोग10:08 – 11:37टालें
उद्वेग11:37 – 13:06टालें
चर13:06 – 14:35सामान्य
लाभ14:35 – 16:04शुभ
अमृत16:04 – 17:33शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:33 – 19:04सामान्य
रोग19:04 – 20:35टालें
काल20:35 – 22:06टालें
लाभ22:06 – 23:37शुभ
उद्वेग23:37 – 01:08टालें
शुभ01:08 – 02:39शुभ
अमृत02:39 – 04:10शुभ
चर04:10 – 05:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4106:40दिन
शनि06:4007:40दिन
गुरु07:4008:39दिन
मंगल08:3909:38दिन
सूर्य09:3810:38दिन
शुक्र10:3811:37दिन
बुध11:3712:36दिन
चंद्र12:3613:36दिन
शनि13:3614:35दिन
गुरु14:3515:34दिन
मंगल15:3416:34दिन
सूर्य16:3417:33दिन
शुक्र17:3318:34रात
बुध18:3419:35रात
चंद्र19:3520:35रात
शनि20:3521:36रात
गुरु21:3622:37रात
मंगल22:3723:37रात
सूर्य23:3700:38रात
शुक्र00:3801:39रात
बुध01:3902:39रात
चंद्र02:3903:40रात
शनि03:4004:41रात
गुरु04:4105:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कुवैत सिटी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2726° (लाहिड़ी)। समय कुवैत सिटी (Asia/Kuwait) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।