6 नवंबर 2027 को लेह का पंचांग

शनिवार, 6 नवंबर 2027, लेह, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 6 नवंबर 2027 को लेह में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (02:50, 7 नव॰ तक), नक्षत्र श्रवण (21:26 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:43 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 09:23 से 10:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:43 – 17:22
रात 06:44 तक
तिथि
अष्टमी, 02:50 तक
नवमी
नक्षत्र
श्रवण, 21:26 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 02:50, 7 नव॰ तक
शुक्ल नवमी 05:24, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 21:26 तक
धनिष्ठा 00:30, 8 नव॰ तक
योग
गंडअशुभ 21:53 तक
वृद्धि 22:50, 7 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:30 तक
बव 02:50, 7 नव॰ तक
बालव 16:09, 7 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:43
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
13:07
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
09:23 – 10:43
यमगंड
13:22 – 14:42
गुलिक काल
06:43 – 08:03

6 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:43 – 08:03टालें
शुभ08:03 – 09:23शुभ
रोग09:23 – 10:43टालें
उद्वेग10:43 – 12:03टालें
चर12:03 – 13:22सामान्य
लाभ13:22 – 14:42शुभ
अमृत14:42 – 16:02शुभ
काल16:02 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:22 – 19:02शुभ
उद्वेग19:02 – 20:43टालें
शुभ20:43 – 22:23शुभ
अमृत22:23 – 00:03शुभ
चर00:03 – 01:43सामान्य
रोग01:43 – 03:23टालें
काल03:23 – 05:04टालें
लाभ05:04 – 06:44शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4307:36दिन
गुरु07:3608:30दिन
मंगल08:3009:23दिन
सूर्य09:2310:16दिन
शुक्र10:1611:09दिन
बुध11:0912:03दिन
चंद्र12:0312:56दिन
शनि12:5613:49दिन
गुरु13:4914:42दिन
मंगल14:4215:36दिन
सूर्य15:3616:29दिन
शुक्र16:2917:22दिन
बुध17:2218:29रात
चंद्र18:2919:36रात
शनि19:3620:43रात
गुरु20:4321:49रात
मंगल21:4922:56रात
सूर्य22:5600:03रात
शुक्र00:0301:10रात
बुध01:1002:17रात
चंद्र02:1703:23रात
शनि03:2304:30रात
गुरु04:3005:37रात
मंगल05:3706:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लेह में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2460° (लाहिड़ी)। समय लेह (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।