2 अक्टूबर 2025 को लेस्टर का पंचांग

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (14:41 तक), नक्षत्र श्रवण (05:04, 3 अक्टू॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 14:19 से 15:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 18:38
रात 07:09 तक
तिथि
दशमी, 14:41 तक
एकादशी
नक्षत्र
श्रवण, 05:04 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 14:41 तक
शुक्ल एकादशी 14:03, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 05:04, 3 अक्टू॰ तक
धनिष्ठा 04:39, 4 अक्टू॰ तक
योग
सुकर्मा 18:58 तक
धृति 17:15, 3 अक्टू॰ तक
करण
गर 14:41 तक
वणिज 02:28, 3 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:03, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
17:14
चंद्रास्त
00:21
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:28 – 06:17
अभिजीत मुहूर्त
12:30 – 13:16

अशुभ समय

राहुकाल
14:19 – 15:46
यमगंड
07:07 – 08:34
गुलिक काल
10:00 – 11:26

2 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:07 – 08:34शुभ
रोग08:34 – 10:00टालें
उद्वेग10:00 – 11:26टालें
चर11:26 – 12:53सामान्य
लाभ12:53 – 14:19शुभ
अमृत14:19 – 15:46शुभ
काल15:46 – 17:12टालें
शुभ17:12 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:38 – 20:12शुभ
चर20:12 – 21:46सामान्य
रोग21:46 – 23:20टालें
काल23:20 – 00:54टालें
लाभ00:54 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 04:01टालें
शुभ04:01 – 05:35शुभ
अमृत05:35 – 07:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0708:05दिन
मंगल08:0509:02दिन
सूर्य09:0210:00दिन
शुक्र10:0010:58दिन
बुध10:5811:55दिन
चंद्र11:5512:53दिन
शनि12:5313:50दिन
गुरु13:5014:48दिन
मंगल14:4815:46दिन
सूर्य15:4616:43दिन
शुक्र16:4317:41दिन
बुध17:4118:38दिन
चंद्र18:3819:41रात
शनि19:4120:43रात
गुरु20:4321:46रात
मंगल21:4622:49रात
सूर्य22:4923:51रात
शुक्र23:5100:54रात
बुध00:5401:56रात
चंद्र01:5602:59रात
शनि02:5904:01रात
गुरु04:0105:04रात
मंगल05:0406:06रात
सूर्य06:0607:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2168° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।