28 सितंबर 2026 को लेस्टर का पंचांग

सोमवार, 28 सितंबर 2026, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 28 सितंबर 2026 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (14:44 तक), नक्षत्र अश्विनी (04:33, 29 सित॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 08:29 से 09:57 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 18:48
रात 07:02 तक
तिथि
द्वितीया, 14:44 तक
तृतीया
नक्षत्र
अश्विनी, 04:33 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 14:44 तक
कृष्ण तृतीया 12:40, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 04:33, 29 सित॰ तक
भरणी 03:06, 30 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 01:43, 29 सित॰ तक
हर्षण 22:50, 29 सित॰ तक
करण
गर 14:44 तक
वणिज 01:44, 29 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:40, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
18:56
चंद्रास्त
09:23
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
12:31 – 13:18

अशुभ समय

राहुकाल
08:29 – 09:57
यमगंड
11:26 – 12:54
गुलिक काल
14:23 – 15:51

28 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:00 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:57टालें
शुभ09:57 – 11:26शुभ
रोग11:26 – 12:54टालें
उद्वेग12:54 – 14:23टालें
चर14:23 – 15:51सामान्य
लाभ15:51 – 17:20शुभ
अमृत17:20 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:20सामान्य
रोग20:20 – 21:52टालें
काल21:52 – 23:23टालें
लाभ23:23 – 00:55शुभ
उद्वेग00:55 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:30शुभ
चर05:30 – 07:02सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0007:59दिन
शनि07:5908:58दिन
गुरु08:5809:57दिन
मंगल09:5710:56दिन
सूर्य10:5611:55दिन
शुक्र11:5512:54दिन
बुध12:5413:53दिन
चंद्र13:5314:52दिन
शनि14:5215:51दिन
गुरु15:5116:50दिन
मंगल16:5017:49दिन
सूर्य17:4918:48दिन
शुक्र18:4819:49रात
बुध19:4920:51रात
चंद्र20:5121:52रात
शनि21:5222:53रात
गुरु22:5323:54रात
मंगल23:5400:55रात
सूर्य00:5501:56रात
शुक्र01:5602:57रात
बुध02:5703:58रात
चंद्र03:5804:59रात
शनि04:5906:01रात
गुरु06:0107:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2306° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।