20 सितंबर 2027 को लेस्टर का पंचांग

सोमवार, 20 सितंबर 2027, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 20 सितंबर 2027 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (02:13, 21 सित॰ तक), नक्षत्र भरणी (13:39 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 08:19 से 09:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 19:08
रात 06:48 तक
तिथि
पंचमी, 02:13 तक
षष्ठी
नक्षत्र
भरणी, 13:39 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 02:13, 21 सित॰ तक
कृष्ण षष्ठी 01:22, 22 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:39 तक
कृत्तिका 13:43, 21 सित॰ तक
योग
हर्षण 01:19, 21 सित॰ तक
वज्रअशुभ 23:34, 21 सित॰ तक
करण
कौलव 14:29 तक
तैतिल 02:13, 21 सित॰ तक
गर 13:51, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 19:42 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
20:10
चंद्रास्त
12:24
दिनमान
12h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:19 – 09:52
यमगंड
11:24 – 12:57
गुलिक काल
14:30 – 16:02

20 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:46 – 08:19शुभ
काल08:19 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:24शुभ
रोग11:24 – 12:57टालें
उद्वेग12:57 – 14:30टालें
चर14:30 – 16:02सामान्य
लाभ16:02 – 17:35शुभ
अमृत17:35 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:08 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 22:03टालें
काल22:03 – 23:30टालें
लाभ23:30 – 00:58शुभ
उद्वेग00:58 – 02:25टालें
शुभ02:25 – 03:53शुभ
अमृत03:53 – 05:20शुभ
चर05:20 – 06:48सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4607:48दिन
शनि07:4808:50दिन
गुरु08:5009:52दिन
मंगल09:5210:53दिन
सूर्य10:5311:55दिन
शुक्र11:5512:57दिन
बुध12:5713:59दिन
चंद्र13:5915:01दिन
शनि15:0116:02दिन
गुरु16:0217:04दिन
मंगल17:0418:06दिन
सूर्य18:0619:08दिन
शुक्र19:0820:06रात
बुध20:0621:05रात
चंद्र21:0522:03रात
शनि22:0323:01रात
गुरु23:0100:00रात
मंगल00:0000:58रात
सूर्य00:5801:56रात
शुक्र01:5602:54रात
बुध02:5403:53रात
चंद्र03:5304:51रात
शनि04:5105:49रात
गुरु05:4906:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2443° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।