24 सितंबर 2029 को लेस्टर का पंचांग

सोमवार, 24 सितंबर 2029, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 24 सितंबर 2029 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (21:46 तक), नक्षत्र रेवती (18:07 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:57 पर है। राहुकाल 08:24 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 18:57
रात 06:55 तक
तिथि
द्वितीया, 21:46 तक
तृतीया
नक्षत्र
रेवती, 18:07 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 21:46 तक
कृष्ण तृतीया 00:15, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 18:07 तक
अश्विनी 21:06, 25 सित॰ तक
योग
ध्रुव 22:29 तक
व्याघातअशुभ 23:25, 25 सित॰ तक
करण
तैतिल 08:35 तक
गर 21:46 तक
वणिज 10:59, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
मीन 18:07 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
18:57
चंद्रोदय
18:59
चंद्रास्त
09:00
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
12:31 – 13:20

अशुभ समय

राहुकाल
08:24 – 09:55
यमगंड
11:25 – 12:55
गुलिक काल
14:26 – 15:56

24 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:54 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:25शुभ
रोग11:25 – 12:55टालें
उद्वेग12:55 – 14:26टालें
चर14:26 – 15:56सामान्य
लाभ15:56 – 17:27शुभ
अमृत17:27 – 18:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:57 – 20:27सामान्य
रोग20:27 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:26टालें
लाभ23:26 – 00:56शुभ
उद्वेग00:56 – 02:26टालें
शुभ02:26 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:26शुभ
चर05:26 – 06:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5407:54दिन
शनि07:5408:54दिन
गुरु08:5409:55दिन
मंगल09:5510:55दिन
सूर्य10:5511:55दिन
शुक्र11:5512:55दिन
बुध12:5513:56दिन
चंद्र13:5614:56दिन
शनि14:5615:56दिन
गुरु15:5616:57दिन
मंगल16:5717:57दिन
सूर्य17:5718:57दिन
शुक्र18:5719:57रात
बुध19:5720:57रात
चंद्र20:5721:57रात
शनि21:5722:57रात
गुरु22:5723:56रात
मंगल23:5600:56रात
सूर्य00:5601:56रात
शुक्र01:5602:56रात
बुध02:5603:56रात
चंद्र03:5604:56रात
शनि04:5605:55रात
गुरु05:5506:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
10 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2724° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।