12 दिसंबर 2025 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (09:27 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (00:20, 13 दिस॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:57 पर और सूर्यास्त 15:51 पर है। राहुकाल 10:54 से 11:54 तक है।

दिन और रात
दिन 07:57 – 15:51
रात 07:58 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 00:20 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 09:27 तक
कृष्ण नवमी 11:08, 13 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 00:20, 13 दिस॰ तक
हस्त 02:48, 14 दिस॰ तक
योग
आयुष्मान 05:46, 13 दिस॰ तक
सौभाग्य 06:15, 14 दिस॰ तक
करण
कौलव 09:27 तक
तैतिल 22:13 तक
गर 11:08, 13 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:57
सूर्यास्त
15:51
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:22
दिनमान
7h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:48 – 06:52
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:10

अशुभ समय

राहुकाल
10:54 – 11:54
यमगंड
13:52 – 14:52
गुलिक काल
08:56 – 09:55

12 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:57 – 08:56सामान्य
लाभ08:56 – 09:55शुभ
अमृत09:55 – 10:54शुभ
काल10:54 – 11:54टालें
शुभ11:54 – 12:53शुभ
रोग12:53 – 13:52टालें
उद्वेग13:52 – 14:52टालें
चर14:52 – 15:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग15:51 – 17:52टालें
काल17:52 – 19:53टालें
लाभ19:53 – 21:53शुभ
उद्वेग21:53 – 23:54टालें
शुभ23:54 – 01:55शुभ
अमृत01:55 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:57सामान्य
रोग05:57 – 07:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:5708:36दिन
बुध08:3609:16दिन
चंद्र09:1609:55दिन
शनि09:5510:35दिन
गुरु10:3511:14दिन
मंगल11:1411:54दिन
सूर्य11:5412:33दिन
शुक्र12:3313:13दिन
बुध13:1313:52दिन
चंद्र13:5214:32दिन
शनि14:3215:11दिन
गुरु15:1115:51दिन
मंगल15:5117:11रात
सूर्य17:1118:32रात
शुक्र18:3219:53रात
बुध19:5321:13रात
चंद्र21:1322:34रात
शनि22:3423:54रात
गुरु23:5401:15रात
मंगल01:1502:35रात
सूर्य02:3503:56रात
शुक्र03:5605:16रात
बुध05:1606:37रात
चंद्र06:3707:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
23 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2195° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।