19 अप्रैल 2026 को लंदन का पंचांग

रविवार, 19 अप्रैल 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

रविवार, 19 अप्रैल 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (06:19 तक), नक्षत्र कृत्तिका (00:05, 20 अप्रैल तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 20:03 पर है। राहुकाल 18:17 से 20:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 20:03
रात 05:54 तक
तिथि
तृतीया, 02:58 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
कृत्तिका, 00:05 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अप्रैल 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 06:19 तक
शुक्ल तृतीया 02:58, 20 अप्रैल तक
शुक्ल चतुर्थी 23:45, 20 अप्रैल तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:05, 20 अप्रैल तक
रोहिणी 21:38, 20 अप्रैल तक
योग
आयुष्मान 15:32 तक
सौभाग्य 11:41, 20 अप्रैल तक
करण
कौलव 06:19 तक
तैतिल 16:38 तक
गर 02:58, 20 अप्रैल तक
वणिज 13:20, 20 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मेष 08:01 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
20:03
चंद्रोदय
06:18
चंद्रास्त
23:41
दिनमान
14h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
12:31 – 13:28

अशुभ समय

राहुकाल
18:17 – 20:03
यमगंड
13:00 – 14:46
गुलिक काल
16:31 – 18:17

19 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:56 – 07:42टालें
चर07:42 – 09:28सामान्य
लाभ09:28 – 11:14शुभ
अमृत11:14 – 13:00शुभ
काल13:00 – 14:46टालें
शुभ14:46 – 16:31शुभ
रोग16:31 – 18:17टालें
उद्वेग18:17 – 20:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ20:03 – 21:17शुभ
अमृत21:17 – 22:31शुभ
चर22:31 – 23:45सामान्य
रोग23:45 – 00:59टालें
काल00:59 – 02:12टालें
लाभ02:12 – 03:26शुभ
उद्वेग03:26 – 04:40टालें
शुभ04:40 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5607:07दिन
शुक्र07:0708:17दिन
बुध08:1709:28दिन
चंद्र09:2810:38दिन
शनि10:3811:49दिन
गुरु11:4913:00दिन
मंगल13:0014:10दिन
सूर्य14:1015:21दिन
शुक्र15:2116:31दिन
बुध16:3117:42दिन
चंद्र17:4218:53दिन
शनि18:5320:03दिन
गुरु20:0320:53रात
मंगल20:5321:42रात
सूर्य21:4222:31रात
शुक्र22:3123:20रात
बुध23:2000:09रात
चंद्र00:0900:59रात
शनि00:5901:48रात
गुरु01:4802:37रात
मंगल02:3703:26रात
सूर्य03:2604:15रात
शुक्र04:1505:05रात
बुध05:0505:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2244° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।