27 नवंबर 2026 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 27 नवंबर 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (01:10, 28 नव॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (09:38 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:37 पर और सूर्यास्त 15:57 पर है। राहुकाल 10:45 से 11:47 तक है।

दिन और रात
दिन 07:37 – 15:57
रात 07:39 तक
तिथि
चतुर्थी, 01:10 तक
पंचमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 07:20 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 नवंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 01:10, 28 नव॰ तक
कृष्ण पंचमी 22:27, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 07:20, 28 नव॰ तक
पुष्य 05:29, 29 नव॰ तक
योग
शुभ 18:21 तक
शुक्ल 14:48, 28 नव॰ तक
करण
बव 14:41 तक
बालव 01:10, 28 नव॰ तक
कौलव 11:45, 28 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 01:52, 28 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:37
सूर्यास्त
15:57
चंद्रोदय
18:40
चंद्रास्त
11:09
दिनमान
8h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:32 – 06:35
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:04

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 11:47
यमगंड
13:52 – 14:55
गुलिक काल
08:40 – 09:42

27 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:37 – 08:40सामान्य
लाभ08:40 – 09:42शुभ
अमृत09:42 – 10:45शुभ
काल10:45 – 11:47टालें
शुभ11:47 – 12:50शुभ
रोग12:50 – 13:52टालें
उद्वेग13:52 – 14:55टालें
चर14:55 – 15:57सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग15:57 – 17:55टालें
काल17:55 – 19:53टालें
लाभ19:53 – 21:50शुभ
उद्वेग21:50 – 23:48टालें
शुभ23:48 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:44शुभ
चर03:44 – 05:41सामान्य
रोग05:41 – 07:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3708:19दिन
बुध08:1909:01दिन
चंद्र09:0109:42दिन
शनि09:4210:24दिन
गुरु10:2411:06दिन
मंगल11:0611:47दिन
सूर्य11:4712:29दिन
शुक्र12:2913:11दिन
बुध13:1113:52दिन
चंद्र13:5214:34दिन
शनि14:3415:16दिन
गुरु15:1615:57दिन
मंगल15:5717:16रात
सूर्य17:1618:34रात
शुक्र18:3419:53रात
बुध19:5321:11रात
चंद्र21:1122:30रात
शनि22:3023:48रात
गुरु23:4801:07रात
मंगल01:0702:25रात
सूर्य02:2503:44रात
शुक्र03:4405:02रात
बुध05:0206:20रात
चंद्र06:2007:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2329° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।