2 दिसंबर 2026 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 2 दिसंबर 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 2 दिसंबर 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (17:22 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:53, 3 दिस॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:45 पर और सूर्यास्त 15:54 पर है। राहुकाल 11:49 से 12:50 तक है।

दिन और रात
दिन 07:45 – 15:54
रात 07:46 तक
तिथि
नवमी, 17:22 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:53 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 17:22 तक
कृष्ण दशमी 17:34, 3 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 03:53, 3 दिस॰ तक
हस्त 04:53, 4 दिस॰ तक
योग
प्रीति 03:45, 3 दिस॰ तक
आयुष्मान 02:53, 4 दिस॰ तक
करण
गर 17:22 तक
वणिज 05:24, 3 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:34, 3 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 09:29 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:45
सूर्यास्त
15:54
चंद्रोदय
00:23
चंद्रास्त
12:50
दिनमान
8h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:38 – 06:41
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:06 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:49 – 12:50
यमगंड
08:46 – 09:47
गुलिक काल
10:48 – 11:49

2 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:45 – 08:46शुभ
अमृत08:46 – 09:47शुभ
काल09:47 – 10:48टालें
शुभ10:48 – 11:49शुभ
रोग11:49 – 12:50टालें
उद्वेग12:50 – 13:52टालें
चर13:52 – 14:53सामान्य
लाभ14:53 – 15:54शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग15:54 – 17:53टालें
शुभ17:53 – 19:52शुभ
अमृत19:52 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:50सामान्य
रोग23:50 – 01:49टालें
काल01:49 – 03:48टालें
लाभ03:48 – 05:47शुभ
उद्वेग05:47 – 07:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:4508:25दिन
चंद्र08:2509:06दिन
शनि09:0609:47दिन
गुरु09:4710:28दिन
मंगल10:2811:08दिन
सूर्य11:0811:49दिन
शुक्र11:4912:30दिन
बुध12:3013:11दिन
चंद्र13:1113:52दिन
शनि13:5214:32दिन
गुरु14:3215:13दिन
मंगल15:1315:54दिन
सूर्य15:5417:13रात
शुक्र17:1318:33रात
बुध18:3319:52रात
चंद्र19:5221:11रात
शनि21:1122:31रात
गुरु22:3123:50रात
मंगल23:5001:09रात
सूर्य01:0902:29रात
शुक्र02:2903:48रात
बुध03:4805:07रात
चंद्र05:0706:27रात
शनि06:2707:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2331° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।