21 दिसंबर 2026 को लंदन का पंचांग

सोमवार, 21 दिसंबर 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (12:06 तक), नक्षत्र कृत्तिका (05:15, 22 दिस॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 08:03 पर और सूर्यास्त 15:53 पर है। राहुकाल 09:02 से 10:01 तक है।

दिन और रात
दिन 08:03 – 15:53
रात 08:04 तक
तिथि
द्वादशी, 12:06 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 05:15 तक
रोहिणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 12:06 तक
शुक्ल त्रयोदशी 08:54, 22 दिस॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 05:15, 22 दिस॰ तक
रोहिणी 02:26, 23 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 20:02 तक
साध्य 16:02, 22 दिस॰ तक
करण
बालव 12:06 तक
कौलव 22:34 तक
तैतिल 08:54, 22 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 13:06 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
08:03
सूर्यास्त
15:53
चंद्रोदय
13:08
चंद्रास्त
05:07
दिनमान
7h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:54 – 06:58
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
09:02 – 10:01
यमगंड
10:59 – 11:58
गुलिक काल
12:57 – 13:55

21 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत08:03 – 09:02शुभ
काल09:02 – 10:01टालें
शुभ10:01 – 10:59शुभ
रोग10:59 – 11:58टालें
उद्वेग11:58 – 12:57टालें
चर12:57 – 13:55सामान्य
लाभ13:55 – 14:54शुभ
अमृत14:54 – 15:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर15:53 – 17:54सामान्य
रोग17:54 – 19:56टालें
काल19:56 – 21:57टालें
लाभ21:57 – 23:58शुभ
उद्वेग23:58 – 02:00टालें
शुभ02:00 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 06:02शुभ
चर06:02 – 08:04सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र08:0308:42दिन
शनि08:4209:22दिन
गुरु09:2210:01दिन
मंगल10:0110:40दिन
सूर्य10:4011:19दिन
शुक्र11:1911:58दिन
बुध11:5812:37दिन
चंद्र12:3713:16दिन
शनि13:1613:55दिन
गुरु13:5514:35दिन
मंगल14:3515:14दिन
सूर्य15:1415:53दिन
शुक्र15:5317:14रात
बुध17:1418:35रात
चंद्र18:3519:56रात
शनि19:5621:17रात
गुरु21:1722:37रात
मंगल22:3723:58रात
सूर्य23:5801:19रात
शुक्र01:1902:40रात
बुध02:4004:01रात
चंद्र04:0105:22रात
शनि05:2206:43रात
गुरु06:4308:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
11 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2338° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।