20 जून 2027 को लंदन का पंचांग

रविवार, 20 जून 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

रविवार, 20 जून 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (06:05, 21 जून तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (00:34, 21 जून तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 04:42 पर और सूर्यास्त 21:21 पर है। राहुकाल 19:16 से 21:21 तक है।

दिन और रात
दिन 04:42 – 21:21
रात 04:43 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 00:34 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त
अभिजीत

20 जून 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 06:05, 21 जून तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 00:34, 21 जून तक
उत्तराषाढ़ा 03:38, 22 जून तक
योग
ब्रह्म 03:21, 21 जून तक
इंद्र 04:25, 22 जून तक
करण
तैतिल 16:53 तक
गर 06:05, 21 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:42
सूर्यास्त
21:21
चंद्रोदय
22:48
चंद्रास्त
05:29
दिनमान
16h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:13
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
19:16 – 21:21
यमगंड
13:02 – 15:06
गुलिक काल
17:11 – 19:16

20 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग04:42 – 06:47टालें
चर06:47 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:57शुभ
अमृत10:57 – 13:02शुभ
काल13:02 – 15:06टालें
शुभ15:06 – 17:11शुभ
रोग17:11 – 19:16टालें
उद्वेग19:16 – 21:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ21:21 – 22:16शुभ
अमृत22:16 – 23:11शुभ
चर23:11 – 00:06सामान्य
रोग00:06 – 01:02टालें
काल01:02 – 01:57टालें
लाभ01:57 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 03:47टालें
शुभ03:47 – 04:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य04:4206:06दिन
शुक्र06:0607:29दिन
बुध07:2908:52दिन
चंद्र08:5210:15दिन
शनि10:1511:38दिन
गुरु11:3813:02दिन
मंगल13:0214:25दिन
सूर्य14:2515:48दिन
शुक्र15:4817:11दिन
बुध17:1118:34दिन
चंद्र18:3419:58दिन
शनि19:5821:21दिन
गुरु21:2121:58रात
मंगल21:5822:34रात
सूर्य22:3423:11रात
शुक्र23:1123:48रात
बुध23:4800:25रात
चंद्र00:2501:02रात
शनि01:0201:38रात
गुरु01:3802:15रात
मंगल02:1502:52रात
सूर्य02:5203:29रात
शुक्र03:2904:06रात
बुध04:0604:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2407° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।