22 जुलाई 2027 को लंदन का पंचांग

गुरुवार, 22 जुलाई 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

गुरुवार, 22 जुलाई 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (02:26, 23 जुल॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (18:55 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 21:03 पर है। राहुकाल 15:05 से 17:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 21:03
रात 05:10 तक
तिथि
चतुर्थी, 02:26 तक
पंचमी
नक्षत्र
शतभिषा, 18:55 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जुलाई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 02:26, 23 जुल॰ तक
कृष्ण पंचमी 04:11, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 18:55 तक
पूर्वा भाद्रपद 21:23, 23 जुल॰ तक
योग
सौभाग्य 14:57 तक
शोभन 15:33, 23 जुल॰ तक
करण
बव 13:24 तक
बालव 02:26, 23 जुल॰ तक
कौलव 15:22, 23 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
21:03
चंद्रोदय
22:17
चंद्रास्त
09:11
दिनमान
15h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
12:34 – 13:38

अशुभ समय

राहुकाल
15:05 – 17:05
यमगंड
05:09 – 07:08
गुलिक काल
09:08 – 11:07

22 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:09 – 07:08शुभ
रोग07:08 – 09:08टालें
उद्वेग09:08 – 11:07टालें
चर11:07 – 13:06सामान्य
लाभ13:06 – 15:05शुभ
अमृत15:05 – 17:05शुभ
काल17:05 – 19:04टालें
शुभ19:04 – 21:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत21:03 – 22:04शुभ
चर22:04 – 23:05सामान्य
रोग23:05 – 00:06टालें
काल00:06 – 01:07टालें
लाभ01:07 – 02:08शुभ
उद्वेग02:08 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:09शुभ
अमृत04:09 – 05:10शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:0906:29दिन
मंगल06:2907:48दिन
सूर्य07:4809:08दिन
शुक्र09:0810:27दिन
बुध10:2711:47दिन
चंद्र11:4713:06दिन
शनि13:0614:26दिन
गुरु14:2615:45दिन
मंगल15:4517:05दिन
सूर्य17:0518:24दिन
शुक्र18:2419:44दिन
बुध19:4421:03दिन
चंद्र21:0321:44रात
शनि21:4422:24रात
गुरु22:2423:05रात
मंगल23:0523:46रात
सूर्य23:4600:26रात
शुक्र00:2601:07रात
बुध01:0701:47रात
चंद्र01:4702:28रात
शनि02:2803:09रात
गुरु03:0903:49रात
मंगल03:4904:30रात
सूर्य04:3005:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2420° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।