28 जुलाई 2027 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 28 जुलाई 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 28 जुलाई 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (03:04, 29 जुल॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (00:28, 29 जुल॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 20:55 पर है। राहुकाल 13:06 से 15:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 20:55
रात 05:19 तक
तिथि
दशमी, 03:04 तक
एकादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 00:28 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण दशमी 03:04, 29 जुल॰ तक
कृष्ण एकादशी 00:43, 30 जुल॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:28, 29 जुल॰ तक
रोहिणी 22:58, 29 जुल॰ तक
योग
गंडअशुभ 11:24 तक
वृद्धि 08:50, 29 जुल॰ तक
करण
वणिज 16:00 तक
विष्टि (भद्रा) 03:04, 29 जुल॰ तक
बव 13:58, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मेष 07:09 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
20:55
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
16:44
दिनमान
15h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:06 – 15:03
यमगंड
07:15 – 09:12
गुलिक काल
11:09 – 13:06

28 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:17 – 07:15शुभ
अमृत07:15 – 09:12शुभ
काल09:12 – 11:09टालें
शुभ11:09 – 13:06शुभ
रोग13:06 – 15:03टालें
उद्वेग15:03 – 17:00टालें
चर17:00 – 18:58सामान्य
लाभ18:58 – 20:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:55 – 21:58टालें
शुभ21:58 – 23:01शुभ
अमृत23:01 – 00:04शुभ
चर00:04 – 01:07सामान्य
रोग01:07 – 02:10टालें
काल02:10 – 03:13टालें
लाभ03:13 – 04:16शुभ
उद्वेग04:16 – 05:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1706:36दिन
चंद्र06:3607:54दिन
शनि07:5409:12दिन
गुरु09:1210:30दिन
मंगल10:3011:48दिन
सूर्य11:4813:06दिन
शुक्र13:0614:24दिन
बुध14:2415:42दिन
चंद्र15:4217:00दिन
शनि17:0018:19दिन
गुरु18:1919:37दिन
मंगल19:3720:55दिन
सूर्य20:5521:37रात
शुक्र21:3722:19रात
बुध22:1923:01रात
चंद्र23:0123:43रात
शनि23:4300:25रात
गुरु00:2501:07रात
मंगल01:0701:49रात
सूर्य01:4902:31रात
शुक्र02:3103:13रात
बुध03:1303:55रात
चंद्र03:5504:37रात
शनि04:3705:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2422° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।