5 अक्टूबर 2029 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (03:21, 6 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मघा (08:30 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 11:23 से 12:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 18:28
रात 07:09 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:21 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 06:17 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:21, 6 अक्टू॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 23:56, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:30 तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:17, 6 अक्टू॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 03:36, 7 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 16:37 तक
शुक्ल 12:52, 6 अक्टू॰ तक
करण
गर 16:52 तक
वणिज 03:21, 6 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:41, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
03:57
चंद्रास्त
17:01
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:27 – 06:17
अभिजीत मुहूर्त
12:25 – 13:11

अशुभ समय

राहुकाल
11:23 – 12:48
यमगंड
15:38 – 17:03
गुलिक काल
08:33 – 09:58

5 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:08 – 08:33सामान्य
लाभ08:33 – 09:58शुभ
अमृत09:58 – 11:23शुभ
काल11:23 – 12:48टालें
शुभ12:48 – 14:13शुभ
रोग14:13 – 15:38टालें
उद्वेग15:38 – 17:03टालें
चर17:03 – 18:28सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:28 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:38टालें
लाभ21:38 – 23:14शुभ
उद्वेग23:14 – 00:49टालें
शुभ00:49 – 02:24शुभ
अमृत02:24 – 03:59शुभ
चर03:59 – 05:34सामान्य
रोग05:34 – 07:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0808:04दिन
बुध08:0409:01दिन
चंद्र09:0109:58दिन
शनि09:5810:54दिन
गुरु10:5411:51दिन
मंगल11:5112:48दिन
सूर्य12:4813:45दिन
शुक्र13:4514:41दिन
बुध14:4115:38दिन
चंद्र15:3816:35दिन
शनि16:3517:31दिन
गुरु17:3118:28दिन
मंगल18:2819:32रात
सूर्य19:3220:35रात
शुक्र20:3521:38रात
बुध21:3822:42रात
चंद्र22:4223:45रात
शनि23:4500:49रात
गुरु00:4901:52रात
मंगल01:5202:56रात
सूर्य02:5603:59रात
शुक्र03:5905:02रात
बुध05:0206:06रात
चंद्र06:0607:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
10 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2728° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।