20 दिसंबर 2029 को लंदन का पंचांग

गुरुवार, 20 दिसंबर 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (22:46 तक), नक्षत्र मृगशिरा (01:54, 21 दिस॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 08:03 पर और सूर्यास्त 15:53 पर है। राहुकाल 12:56 से 13:55 तक है।

दिन और रात
दिन 08:03 – 15:53
रात 08:03 तक
तिथि
पूर्णिमा, 22:46 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 01:54 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
पूर्णिमा 22:46 तक
कृष्ण प्रतिपदा 00:06, 22 दिस॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 01:54, 21 दिस॰ तक
आर्द्रा 03:41, 22 दिस॰ तक
योग
शुभ 16:31 तक
शुक्ल 16:29, 21 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:56 तक
बव 22:46 तक
बालव 11:29, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 12:51 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
08:03
सूर्यास्त
15:53
चंद्रोदय
15:32
चंद्रास्त
07:39
दिनमान
7h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:53 – 06:58
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
12:56 – 13:55
यमगंड
08:03 – 09:02
गुलिक काल
10:00 – 10:59

20 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ08:03 – 09:02शुभ
रोग09:02 – 10:00टालें
उद्वेग10:00 – 10:59टालें
चर10:59 – 11:58सामान्य
लाभ11:58 – 12:56शुभ
अमृत12:56 – 13:55शुभ
काल13:55 – 14:54टालें
शुभ14:54 – 15:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत15:53 – 17:54शुभ
चर17:54 – 19:55सामान्य
रोग19:55 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:58टालें
लाभ23:58 – 01:59शुभ
उद्वेग01:59 – 04:01टालें
शुभ04:01 – 06:02शुभ
अमृत06:02 – 08:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु08:0308:42दिन
मंगल08:4209:21दिन
सूर्य09:2110:00दिन
शुक्र10:0010:39दिन
बुध10:3911:19दिन
चंद्र11:1911:58दिन
शनि11:5812:37दिन
गुरु12:3713:16दिन
मंगल13:1613:55दिन
सूर्य13:5514:34दिन
शुक्र14:3415:13दिन
बुध15:1315:53दिन
चंद्र15:5317:14रात
शनि17:1418:34रात
गुरु18:3419:55रात
मंगल19:5521:16रात
सूर्य21:1622:37रात
शुक्र22:3723:58रात
बुध23:5801:19रात
चंद्र01:1902:40रात
शनि02:4004:01रात
गुरु04:0105:22रात
मंगल05:2206:42रात
सूर्य06:4208:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2757° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।