12 फ़रवरी 2025 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 12 फ़रवरी 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 फ़रवरी 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (19:23 तक), नक्षत्र आश्लेषा (19:35 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 12:20 से 13:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:56
रात 06:44 तक
तिथि
पूर्णिमा, 19:23 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आश्लेषा, 19:35 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 19:23 तक
कृष्ण प्रतिपदा 20:22, 13 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:07, 13 फ़र॰ तक
योग
सौभाग्य 08:06 तक
शोभन 07:31, 13 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:05 तक
बव 19:23 तक
बालव 07:48, 13 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 19:35 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
17:47
चंद्रास्त
06:39
दिनमान
11h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:42 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:20 – 13:44
यमगंड
08:08 – 09:32
गुलिक काल
10:56 – 12:20

12 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:44 – 08:08शुभ
अमृत08:08 – 09:32शुभ
काल09:32 – 10:56टालें
शुभ10:56 – 12:20शुभ
रोग12:20 – 13:44टालें
उद्वेग13:44 – 15:08टालें
चर15:08 – 16:32सामान्य
लाभ16:32 – 17:56शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:56 – 19:32टालें
शुभ19:32 – 21:08शुभ
अमृत21:08 – 22:44शुभ
चर22:44 – 00:20सामान्य
रोग00:20 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:32टालें
लाभ03:32 – 05:08शुभ
उद्वेग05:08 – 06:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4407:40दिन
चंद्र07:4008:36दिन
शनि08:3609:32दिन
गुरु09:3210:28दिन
मंगल10:2811:24दिन
सूर्य11:2412:20दिन
शुक्र12:2013:16दिन
बुध13:1614:12दिन
चंद्र14:1215:08दिन
शनि15:0816:04दिन
गुरु16:0417:00दिन
मंगल17:0017:56दिन
सूर्य17:5619:00रात
शुक्र19:0020:04रात
बुध20:0421:08रात
चंद्र21:0822:12रात
शनि22:1223:16रात
गुरु23:1600:20रात
मंगल00:2001:24रात
सूर्य01:2402:28रात
शुक्र02:2803:32रात
बुध03:3204:36रात
चंद्र04:3605:40रात
शनि05:4006:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2079° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।