30 अप्रैल 2025 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 30 अप्रैल 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (14:12 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:18 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 18:38
रात 05:28 तक
तिथि
तृतीया, 14:12 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 16:18 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 14:12 तक
शुक्ल चतुर्थी 11:24, 1 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:18 तक
मृगशिरा 14:20, 1 मई तक
योग
शोभन 12:01 तक
अतिगंडअशुभ 08:34, 1 मई तक
करण
गर 14:12 तक
वणिज 00:43, 1 मई तक
विष्टि (भद्रा) 11:24, 1 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 03:14, 1 मई तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
07:12
चंद्रास्त
21:52
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:29 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:42
यमगंड
07:07 – 08:46
गुलिक काल
10:24 – 12:03

30 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:28 – 07:07शुभ
अमृत07:07 – 08:46शुभ
काल08:46 – 10:24टालें
शुभ10:24 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:20टालें
चर15:20 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:38 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:20शुभ
अमृत21:20 – 22:41शुभ
चर22:41 – 00:03सामान्य
रोग00:03 – 01:24टालें
काल01:24 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 04:06शुभ
उद्वेग04:06 – 05:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2806:34दिन
चंद्र06:3407:40दिन
शनि07:4008:46दिन
गुरु08:4609:52दिन
मंगल09:5210:57दिन
सूर्य10:5712:03दिन
शुक्र12:0313:09दिन
बुध13:0914:15दिन
चंद्र14:1515:20दिन
शनि15:2016:26दिन
गुरु16:2617:32दिन
मंगल17:3218:38दिन
सूर्य18:3819:32रात
शुक्र19:3220:26रात
बुध20:2621:20रात
चंद्र21:2022:14रात
शनि22:1423:09रात
गुरु23:0900:03रात
मंगल00:0300:57रात
सूर्य00:5701:51रात
शुक्र01:5102:45रात
बुध02:4503:39रात
चंद्र03:3904:33रात
शनि04:3305:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2109° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।