5 मई 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 5 मई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 5 मई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (07:36 तक), नक्षत्र आश्लेषा (14:01 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 07:04 से 08:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:41
रात 05:24 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 14:01 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 मई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 07:36 तक
शुक्ल नवमी 08:39, 6 मई तक
नक्षत्र
मघा 15:52, 6 मई तक
योग
वृद्धि 00:19, 6 मई तक
ध्रुव 00:29, 7 मई तक
करण
बव 07:36 तक
बालव 20:02 तक
कौलव 08:39, 6 मई तक
चंद्र राशि
कर्क 14:01 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
12:25
चंद्रास्त
01:17
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
07:04 – 08:44
यमगंड
10:23 – 12:03
गुलिक काल
13:42 – 15:22

5 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:25 – 07:04शुभ
काल07:04 – 08:44टालें
शुभ08:44 – 10:23शुभ
रोग10:23 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:42टालें
चर13:42 – 15:22सामान्य
लाभ15:22 – 17:01शुभ
अमृत17:01 – 18:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:41 – 20:01सामान्य
रोग20:01 – 21:21टालें
काल21:21 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:02शुभ
उद्वेग00:02 – 01:23टालें
शुभ01:23 – 02:43शुभ
अमृत02:43 – 04:03शुभ
चर04:03 – 05:24सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2506:31दिन
शनि06:3107:37दिन
गुरु07:3708:44दिन
मंगल08:4409:50दिन
सूर्य09:5010:56दिन
शुक्र10:5612:03दिन
बुध12:0313:09दिन
चंद्र13:0914:15दिन
शनि14:1515:22दिन
गुरु15:2216:28दिन
मंगल16:2817:34दिन
सूर्य17:3418:41दिन
शुक्र18:4119:34रात
बुध19:3420:28रात
चंद्र20:2821:21रात
शनि21:2122:15रात
गुरु22:1523:09रात
मंगल23:0900:02रात
सूर्य00:0200:56रात
शुक्र00:5601:49रात
बुध01:4902:43रात
चंद्र02:4303:37रात
शनि03:3704:30रात
गुरु04:3005:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2110° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।