9 मई 2025 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 9 मई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 9 मई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (14:56 तक), नक्षत्र हस्त (00:09, 10 मई तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 10:22 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 18:43
रात 05:21 तक
तिथि
द्वादशी, 14:56 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
हस्त, 00:09 तक
चित्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मई 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 14:56 तक
शुक्ल त्रयोदशी 17:30, 10 मई तक
नक्षत्र
हस्त 00:09, 10 मई तक
चित्रा 03:15, 11 मई तक
योग
वज्रअशुभ 02:57, 10 मई तक
सिद्धि 04:00, 11 मई तक
करण
बालव 14:56 तक
कौलव 04:13, 10 मई तक
तैतिल 17:30, 10 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
15:57
चंद्रास्त
03:15
दिनमान
13h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:57 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
10:22 – 12:02
यमगंड
15:23 – 17:03
गुलिक काल
07:02 – 08:42

9 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:22 – 07:02सामान्य
लाभ07:02 – 08:42शुभ
अमृत08:42 – 10:22शुभ
काल10:22 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:42शुभ
रोग13:42 – 15:23टालें
उद्वेग15:23 – 17:03टालें
चर17:03 – 18:43सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:43 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:22टालें
लाभ21:22 – 22:42शुभ
उद्वेग22:42 – 00:02टालें
शुभ00:02 – 01:22शुभ
अमृत01:22 – 02:42शुभ
चर02:42 – 04:01सामान्य
रोग04:01 – 05:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2206:29दिन
बुध06:2907:35दिन
चंद्र07:3508:42दिन
शनि08:4209:49दिन
गुरु09:4910:56दिन
मंगल10:5612:02दिन
सूर्य12:0213:09दिन
शुक्र13:0914:16दिन
बुध14:1615:23दिन
चंद्र15:2316:29दिन
शनि16:2917:36दिन
गुरु17:3618:43दिन
मंगल18:4319:36रात
सूर्य19:3620:29रात
शुक्र20:2921:22रात
बुध21:2222:16रात
चंद्र22:1623:09रात
शनि23:0900:02रात
गुरु00:0200:55रात
मंगल00:5501:48रात
सूर्य01:4802:42रात
शुक्र02:4203:35रात
बुध03:3504:28रात
चंद्र04:2805:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2112° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।