8 दिसंबर 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 8 दिसंबर 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (16:03 तक), नक्षत्र पुष्य (02:52, 9 दिस॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 08:01 से 09:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:13
रात 06:43 तक
तिथि
चतुर्थी, 16:03 तक
पंचमी
नक्षत्र
पुष्य, 02:52 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 16:03 तक
कृष्ण पंचमी 14:29, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 02:52, 9 दिस॰ तक
आश्लेषा 02:22, 10 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 17:01 तक
इंद्र 14:33, 9 दिस॰ तक
करण
बालव 16:03 तक
कौलव 03:10, 9 दिस॰ तक
तैतिल 14:29, 9 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
20:53
चंद्रास्त
10:03
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
08:01 – 09:20
यमगंड
10:39 – 11:58
गुलिक काल
13:16 – 14:35

8 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:42 – 08:01शुभ
काल08:01 – 09:20टालें
शुभ09:20 – 10:39शुभ
रोग10:39 – 11:58टालें
उद्वेग11:58 – 13:16टालें
चर13:16 – 14:35सामान्य
लाभ14:35 – 15:54शुभ
अमृत15:54 – 17:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:13 – 18:54सामान्य
रोग18:54 – 20:35टालें
काल20:35 – 22:17टालें
लाभ22:17 – 23:58शुभ
उद्वेग23:58 – 01:39टालें
शुभ01:39 – 03:20शुभ
अमृत03:20 – 05:02शुभ
चर05:02 – 06:43सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4207:35दिन
शनि07:3508:27दिन
गुरु08:2709:20दिन
मंगल09:2010:12दिन
सूर्य10:1211:05दिन
शुक्र11:0511:58दिन
बुध11:5812:50दिन
चंद्र12:5013:43दिन
शनि13:4314:35दिन
गुरु14:3515:28दिन
मंगल15:2816:20दिन
सूर्य16:2017:13दिन
शुक्र17:1318:20रात
बुध18:2019:28रात
चंद्र19:2820:35रात
शनि20:3521:43रात
गुरु21:4322:50रात
मंगल22:5023:58रात
सूर्य23:5801:05रात
शुक्र01:0502:13रात
बुध02:1303:20रात
चंद्र03:2004:28रात
शनि04:2805:35रात
गुरु05:3506:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2193° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।