17 दिसंबर 2025 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 17 दिसंबर 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (02:33, 18 दिस॰ तक), नक्षत्र विशाखा (17:11 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 12:02 से 13:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 17:16
रात 06:49 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:33 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
विशाखा, 17:11 तक
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 02:33, 18 दिस॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 04:59, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 17:11 तक
अनुराधा 20:07, 18 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 14:16 तक
धृति 15:05, 18 दिस॰ तक
करण
गर 13:16 तक
वणिज 02:33, 18 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:47, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 10:26 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
04:21
चंद्रास्त
15:00
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:23 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:02 – 13:20
यमगंड
08:06 – 09:25
गुलिक काल
10:43 – 12:02

17 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:48 – 08:06शुभ
अमृत08:06 – 09:25शुभ
काल09:25 – 10:43टालें
शुभ10:43 – 12:02शुभ
रोग12:02 – 13:20टालें
उद्वेग13:20 – 14:39टालें
चर14:39 – 15:57सामान्य
लाभ15:57 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:16 – 18:57टालें
शुभ18:57 – 20:39शुभ
अमृत20:39 – 22:20शुभ
चर22:20 – 00:02सामान्य
रोग00:02 – 01:44टालें
काल01:44 – 03:25टालें
लाभ03:25 – 05:07शुभ
उद्वेग05:07 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4807:40दिन
चंद्र07:4008:33दिन
शनि08:3309:25दिन
गुरु09:2510:17दिन
मंगल10:1711:09दिन
सूर्य11:0912:02दिन
शुक्र12:0212:54दिन
बुध12:5413:46दिन
चंद्र13:4614:39दिन
शनि14:3915:31दिन
गुरु15:3116:23दिन
मंगल16:2317:16दिन
सूर्य17:1618:23रात
शुक्र18:2319:31रात
बुध19:3120:39रात
चंद्र20:3921:47रात
शनि21:4722:54रात
गुरु22:5400:02रात
मंगल00:0201:10रात
सूर्य01:1002:18रात
शुक्र02:1803:25रात
बुध03:2504:33रात
चंद्र04:3305:41रात
शनि05:4106:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2197° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।