20 अप्रैल 2026 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 20 अप्रैल 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (07:28 तक), नक्षत्र रोहिणी (02:08, 21 अप्रैल तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 07:14 से 08:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:32
रात 05:36 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:15 तक
पंचमी
नक्षत्र
रोहिणी, 02:08 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:28 तक
शुक्ल चतुर्थी 04:15, 21 अप्रैल तक
शुक्ल पंचमी 01:20, 22 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 02:08, 21 अप्रैल तक
मृगशिरा 23:58, 21 अप्रैल तक
योग
सौभाग्य 16:11 तक
शोभन 12:31, 21 अप्रैल तक
करण
गर 07:28 तक
वणिज 17:50 तक
विष्टि (भद्रा) 04:15, 21 अप्रैल तक
बव 14:45, 21 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
07:28
चंद्रास्त
22:04
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
07:14 – 08:51
यमगंड
10:28 – 12:05
गुलिक काल
13:42 – 15:19

20 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:37 – 07:14शुभ
काल07:14 – 08:51टालें
शुभ08:51 – 10:28शुभ
रोग10:28 – 12:05टालें
उद्वेग12:05 – 13:42टालें
चर13:42 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 16:55शुभ
अमृत16:55 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:32 – 19:55सामान्य
रोग19:55 – 21:18टालें
काल21:18 – 22:41टालें
लाभ22:41 – 00:04शुभ
उद्वेग00:04 – 01:27टालें
शुभ01:27 – 02:50शुभ
अमृत02:50 – 04:13शुभ
चर04:13 – 05:36सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3706:42दिन
शनि06:4207:47दिन
गुरु07:4708:51दिन
मंगल08:5109:56दिन
सूर्य09:5611:00दिन
शुक्र11:0012:05दिन
बुध12:0513:09दिन
चंद्र13:0914:14दिन
शनि14:1415:19दिन
गुरु15:1916:23दिन
मंगल16:2317:28दिन
सूर्य17:2818:32दिन
शुक्र18:3219:28रात
बुध19:2820:23रात
चंद्र20:2321:18रात
शनि21:1822:14रात
गुरु22:1423:09रात
मंगल23:0900:04रात
सूर्य00:0401:00रात
शुक्र01:0001:55रात
बुध01:5502:50रात
चंद्र02:5003:46रात
शनि03:4604:41रात
गुरु04:4105:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2244° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।