3 मई 2026 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 3 मई 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 3 मई 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (03:02, 4 मई तक), नक्षत्र विशाखा (07:10 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 17:00 से 18:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 18:39
रात 05:25 तक
तिथि
द्वितीया, 03:02 तक
तृतीया
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मई 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 03:02, 4 मई तक
कृष्ण तृतीया 05:24, 5 मई तक
नक्षत्र
विशाखा 07:10 तक
अनुराधा 09:58, 4 मई तक
योग
वरीयान 22:28 तक
परिघअशुभ 23:19, 4 मई तक
करण
तैतिल 13:54 तक
गर 03:02, 4 मई तक
वणिज 16:12, 4 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
20:21
चंद्रास्त
06:02
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
17:00 – 18:39
यमगंड
12:03 – 13:42
गुलिक काल
15:21 – 17:00

3 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:26 – 07:05टालें
चर07:05 – 08:44सामान्य
लाभ08:44 – 10:24शुभ
अमृत10:24 – 12:03शुभ
काल12:03 – 13:42टालें
शुभ13:42 – 15:21शुभ
रोग15:21 – 17:00टालें
उद्वेग17:00 – 18:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:39 – 20:00शुभ
अमृत20:00 – 21:21शुभ
चर21:21 – 22:42सामान्य
रोग22:42 – 00:02टालें
काल00:02 – 01:23टालें
लाभ01:23 – 02:44शुभ
उद्वेग02:44 – 04:05टालें
शुभ04:05 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2606:32दिन
शुक्र06:3207:38दिन
बुध07:3808:44दिन
चंद्र08:4409:51दिन
शनि09:5110:57दिन
गुरु10:5712:03दिन
मंगल12:0313:09दिन
सूर्य13:0914:15दिन
शुक्र14:1515:21दिन
बुध15:2116:27दिन
चंद्र16:2717:33दिन
शनि17:3318:39दिन
गुरु18:3919:33रात
मंगल19:3320:27रात
सूर्य20:2721:21रात
शुक्र21:2122:15रात
बुध22:1523:09रात
चंद्र23:0900:02रात
शनि00:0200:56रात
गुरु00:5601:50रात
मंगल01:5002:44रात
सूर्य02:4403:38रात
शुक्र03:3804:32रात
बुध04:3205:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मई 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 मई 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मई 2026अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2249° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।