29 मई 2026 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 29 मई 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 29 मई 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (09:51 तक), नक्षत्र स्वाति (10:38 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 10:21 से 12:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:54
रात 05:13 तक
तिथि
त्रयोदशी, 09:51 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
स्वाति, 10:38 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 मई 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 09:51 तक
शुक्ल चतुर्दशी 11:58, 30 मई तक
नक्षत्र
स्वाति 10:38 तक
विशाखा 13:20, 30 मई तक
योग
परिघअशुभ 04:35, 30 मई तक
शिव 05:24, 31 मई तक
करण
तैतिल 09:51 तक
गर 22:53 तक
वणिज 11:58, 30 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
17:19
चंद्रास्त
03:25
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
10:21 – 12:03
यमगंड
15:28 – 17:11
गुलिक काल
06:55 – 08:38

29 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:13 – 06:55सामान्य
लाभ06:55 – 08:38शुभ
अमृत08:38 – 10:21शुभ
काल10:21 – 12:03टालें
शुभ12:03 – 13:46शुभ
रोग13:46 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:54सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:54 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 22:46शुभ
उद्वेग22:46 – 00:03टालें
शुभ00:03 – 01:20शुभ
अमृत01:20 – 02:38शुभ
चर02:38 – 03:55सामान्य
रोग03:55 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1306:21दिन
बुध06:2107:30दिन
चंद्र07:3008:38दिन
शनि08:3809:46दिन
गुरु09:4610:55दिन
मंगल10:5512:03दिन
सूर्य12:0313:12दिन
शुक्र13:1214:20दिन
बुध14:2015:28दिन
चंद्र15:2816:37दिन
शनि16:3717:45दिन
गुरु17:4518:54दिन
मंगल18:5419:45रात
सूर्य19:4520:37रात
शुक्र20:3721:28रात
बुध21:2822:20रात
चंद्र22:2023:12रात
शनि23:1200:03रात
गुरु00:0300:55रात
मंगल00:5501:46रात
सूर्य01:4602:38रात
शुक्र02:3803:29रात
बुध03:2904:21रात
चंद्र04:2105:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मई 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मई 2026अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जून 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जून 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 जून 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जून 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जून 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2259° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।