7 जून 2026 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 7 जून 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 जून 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (03:25, 8 जून तक), नक्षत्र धनिष्ठा (07:55 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 17:15 से 18:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:58
रात 05:11 तक
तिथि
सप्तमी, 03:25 तक
अष्टमी
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जून 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 03:25, 8 जून तक
कृष्ण अष्टमी 03:24, 9 जून तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:10, 8 जून तक
योग
वैधृतिअशुभ 10:02 तक
विष्कंभअशुभ 09:28, 8 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:08 तक
बव 03:25, 8 जून तक
बालव 15:30, 8 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:59
दिनमान
13h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
17:15 – 18:58
यमगंड
12:05 – 13:48
गुलिक काल
15:31 – 17:15

7 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:11 – 06:55टालें
चर06:55 – 08:38सामान्य
लाभ08:38 – 10:21शुभ
अमृत10:21 – 12:05शुभ
काल12:05 – 13:48टालें
शुभ13:48 – 15:31शुभ
रोग15:31 – 17:15टालें
उद्वेग17:15 – 18:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:58 – 20:15शुभ
अमृत20:15 – 21:31शुभ
चर21:31 – 22:48सामान्य
रोग22:48 – 00:05टालें
काल00:05 – 01:21टालें
लाभ01:21 – 02:38शुभ
उद्वेग02:38 – 03:55टालें
शुभ03:55 – 05:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1106:20दिन
शुक्र06:2007:29दिन
बुध07:2908:38दिन
चंद्र08:3809:47दिन
शनि09:4710:56दिन
गुरु10:5612:05दिन
मंगल12:0513:13दिन
सूर्य13:1314:22दिन
शुक्र14:2215:31दिन
बुध15:3116:40दिन
चंद्र16:4017:49दिन
शनि17:4918:58दिन
गुरु18:5819:49रात
मंगल19:4920:40रात
सूर्य20:4021:31रात
शुक्र21:3122:22रात
बुध22:2223:13रात
चंद्र23:1300:05रात
शनि00:0500:56रात
गुरु00:5601:47रात
मंगल01:4702:38रात
सूर्य02:3803:29रात
शुक्र03:2904:20रात
बुध04:2005:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जून 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 जून 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जून 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जून 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जून 2026ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2263° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।