8 अगस्त 2026 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 8 अगस्त 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 8 अगस्त 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (13:59 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:51 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 18:49
रात 05:34 तक
तिथि
दशमी, 13:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
रोहिणी, 16:51 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अगस्त 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 13:59 तक
कृष्ण एकादशी 11:05, 9 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:51 तक
मृगशिरा 14:43, 9 अग॰ तक
योग
ध्रुव 09:02 तक
व्याघातअशुभ 05:38, 9 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:59 तक
बव 00:34, 9 अग॰ तक
बालव 11:05, 9 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 03:49, 9 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
00:22
चंद्रास्त
14:58
दिनमान
13h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:32
यमगंड
13:51 – 15:30
गुलिक काल
05:34 – 07:13

8 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:34 – 07:13टालें
शुभ07:13 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:32टालें
उद्वेग10:32 – 12:11टालें
चर12:11 – 13:51सामान्य
लाभ13:51 – 15:30शुभ
अमृत15:30 – 17:09शुभ
काल17:09 – 18:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:49 – 20:09शुभ
उद्वेग20:09 – 21:30टालें
शुभ21:30 – 22:51शुभ
अमृत22:51 – 00:11शुभ
चर00:11 – 01:32सामान्य
रोग01:32 – 02:53टालें
काल02:53 – 04:14टालें
लाभ04:14 – 05:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3406:40दिन
गुरु06:4007:46दिन
मंगल07:4608:52दिन
सूर्य08:5209:59दिन
शुक्र09:5911:05दिन
बुध11:0512:11दिन
चंद्र12:1113:17दिन
शनि13:1714:24दिन
गुरु14:2415:30दिन
मंगल15:3016:36दिन
सूर्य16:3617:42दिन
शुक्र17:4218:49दिन
बुध18:4919:43रात
चंद्र19:4320:36रात
शनि20:3621:30रात
गुरु21:3022:24रात
मंगल22:2423:18रात
सूर्य23:1800:11रात
शुक्र00:1101:05रात
बुध01:0501:59रात
चंद्र01:5902:53रात
शनि02:5303:47रात
गुरु03:4704:40रात
मंगल04:4005:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2286° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।