5 दिसंबर 2026 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 5 दिसंबर 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 दिसंबर 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (00:52, 6 दिस॰ तक), नक्षत्र चित्रा (11:49 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 09:18 से 10:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 17:12
रात 06:41 तक
तिथि
द्वादशी, 00:52 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
चित्रा, 11:49 तक
स्वाति
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 00:52, 6 दिस॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 02:22, 7 दिस॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 11:49 तक
स्वाति 13:38, 6 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 07:53 तक
शोभन 07:41, 6 दिस॰ तक
करण
कौलव 12:15 तक
तैतिल 00:52, 6 दिस॰ तक
गर 13:34, 6 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
03:12
चंद्रास्त
14:27
दिनमान
10h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
09:18 – 10:37
यमगंड
13:15 – 14:34
गुलिक काल
06:40 – 07:59

5 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:40 – 07:59टालें
शुभ07:59 – 09:18शुभ
रोग09:18 – 10:37टालें
उद्वेग10:37 – 11:56टालें
चर11:56 – 13:15सामान्य
लाभ13:15 – 14:34शुभ
अमृत14:34 – 15:53शुभ
काल15:53 – 17:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:12 – 18:53शुभ
उद्वेग18:53 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 22:15शुभ
अमृत22:15 – 23:56शुभ
चर23:56 – 01:38सामान्य
रोग01:38 – 03:19टालें
काल03:19 – 05:00टालें
लाभ05:00 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4007:33दिन
गुरु07:3308:25दिन
मंगल08:2509:18दिन
सूर्य09:1810:11दिन
शुक्र10:1111:03दिन
बुध11:0311:56दिन
चंद्र11:5612:49दिन
शनि12:4913:42दिन
गुरु13:4214:34दिन
मंगल14:3415:27दिन
सूर्य15:2716:20दिन
शुक्र16:2017:12दिन
बुध17:1218:20रात
चंद्र18:2019:27रात
शनि19:2720:34रात
गुरु20:3421:42रात
मंगल21:4222:49रात
सूर्य22:4923:56रात
शुक्र23:5601:04रात
बुध01:0402:11रात
चंद्र02:1103:19रात
शनि03:1904:26रात
गुरु04:2605:33रात
मंगल05:3306:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2332° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।