15 दिसंबर 2026 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 15 दिसंबर 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 दिसंबर 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (21:19 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (11:53 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 14:38 से 15:56 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 17:15
रात 06:47 तक
तिथि
षष्ठी, 21:19 तक
सप्तमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 11:53 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 21:19 तक
शुक्ल सप्तमी 22:46, 16 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:02, 16 दिस॰ तक
योग
हर्षण 13:38 तक
वज्रअशुभ 13:46, 16 दिस॰ तक
करण
कौलव 08:22 तक
तैतिल 21:19 तक
गर 10:08, 16 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
11:01
चंद्रास्त
22:42
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
14:38 – 15:56
यमगंड
09:24 – 10:42
गुलिक काल
12:01 – 13:19

15 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:47 – 08:05टालें
उद्वेग08:05 – 09:24टालें
चर09:24 – 10:42सामान्य
लाभ10:42 – 12:01शुभ
अमृत12:01 – 13:19शुभ
काल13:19 – 14:38टालें
शुभ14:38 – 15:56शुभ
रोग15:56 – 17:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:15 – 18:56टालें
लाभ18:56 – 20:38शुभ
उद्वेग20:38 – 22:19टालें
शुभ22:19 – 00:01शुभ
अमृत00:01 – 01:43शुभ
चर01:43 – 03:24सामान्य
रोग03:24 – 05:06टालें
काल05:06 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4707:39दिन
सूर्य07:3908:31दिन
शुक्र08:3109:24दिन
बुध09:2410:16दिन
चंद्र10:1611:08दिन
शनि11:0812:01दिन
गुरु12:0112:53दिन
मंगल12:5313:45दिन
सूर्य13:4514:38दिन
शुक्र14:3815:30दिन
बुध15:3016:22दिन
चंद्र16:2217:15दिन
शनि17:1518:22रात
गुरु18:2219:30रात
मंगल19:3020:38रात
सूर्य20:3821:46रात
शुक्र21:4622:53रात
बुध22:5300:01रात
चंद्र00:0101:09रात
शनि01:0902:16रात
गुरु02:1603:24रात
मंगल03:2404:32रात
सूर्य04:3205:40रात
शुक्र05:4006:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2336° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।