20 फ़रवरी 2027 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (08:00 तक), नक्षत्र आश्लेषा (16:07 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 09:29 से 10:54 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 18:01
रात 06:38 तक
तिथि
पूर्णिमा, 04:53 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आश्लेषा, 16:07 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 08:00 तक
पूर्णिमा 04:53, 21 फ़र॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 02:03, 22 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 13:51, 21 फ़र॰ तक
योग
शोभन 15:08 तक
अतिगंडअशुभ 11:27, 21 फ़र॰ तक
करण
वणिज 08:00 तक
विष्टि (भद्रा) 18:25 तक
बव 04:53, 21 फ़र॰ तक
बालव 15:25, 21 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 16:07 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
17:28
चंद्रास्त
06:01
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:29 – 10:54
यमगंड
13:45 – 15:10
गुलिक काल
06:38 – 08:04

20 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:38 – 08:04टालें
शुभ08:04 – 09:29शुभ
रोग09:29 – 10:54टालें
उद्वेग10:54 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:45सामान्य
लाभ13:45 – 15:10शुभ
अमृत15:10 – 16:36शुभ
काल16:36 – 18:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:01 – 19:35शुभ
उद्वेग19:35 – 21:10टालें
शुभ21:10 – 22:45शुभ
अमृत22:45 – 00:19शुभ
चर00:19 – 01:54सामान्य
रोग01:54 – 03:28टालें
काल03:28 – 05:03टालें
लाभ05:03 – 06:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3807:35दिन
गुरु07:3508:32दिन
मंगल08:3209:29दिन
सूर्य09:2910:26दिन
शुक्र10:2611:23दिन
बुध11:2312:20दिन
चंद्र12:2013:17दिन
शनि13:1714:13दिन
गुरु14:1315:10दिन
मंगल15:1016:07दिन
सूर्य16:0717:04दिन
शुक्र17:0418:01दिन
बुध18:0119:04रात
चंद्र19:0420:07रात
शनि20:0721:10रात
गुरु21:1022:13रात
मंगल22:1323:16रात
सूर्य23:1600:19रात
शुक्र00:1901:22रात
बुध01:2202:25रात
चंद्र02:2503:28रात
शनि03:2804:31रात
गुरु04:3105:34रात
मंगल05:3406:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2361° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।