21 जुलाई 2027 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 21 जुलाई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 21 जुलाई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (04:47, 22 जुल॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (20:34 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 12:12 से 13:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 19:00
रात 05:25 तक
तिथि
तृतीया, 04:47 तक
नक्षत्र
धनिष्ठा, 20:34 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जुलाई 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 04:47, 22 जुल॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 06:56, 23 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:25, 22 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 18:34 तक
सौभाग्य 19:27, 22 जुल॰ तक
करण
वणिज 15:35 तक
विष्टि (भद्रा) 04:47, 22 जुल॰ तक
बव 17:54, 22 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 07:04 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
20:38
चंद्रास्त
07:31
दिनमान
13h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:01 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:12 – 13:54
यमगंड
07:06 – 08:48
गुलिक काल
10:30 – 12:12

21 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:24 – 07:06शुभ
अमृत07:06 – 08:48शुभ
काल08:48 – 10:30टालें
शुभ10:30 – 12:12शुभ
रोग12:12 – 13:54टालें
उद्वेग13:54 – 15:36टालें
चर15:36 – 17:18सामान्य
लाभ17:18 – 19:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:00 – 20:18टालें
शुभ20:18 – 21:36शुभ
अमृत21:36 – 22:54शुभ
चर22:54 – 00:12सामान्य
रोग00:12 – 01:30टालें
काल01:30 – 02:49टालें
लाभ02:49 – 04:07शुभ
उद्वेग04:07 – 05:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2406:32दिन
चंद्र06:3207:40दिन
शनि07:4008:48दिन
गुरु08:4809:56दिन
मंगल09:5611:04दिन
सूर्य11:0412:12दिन
शुक्र12:1213:20दिन
बुध13:2014:28दिन
चंद्र14:2815:36दिन
शनि15:3616:44दिन
गुरु16:4417:52दिन
मंगल17:5219:00दिन
सूर्य19:0019:52रात
शुक्र19:5220:44रात
बुध20:4421:36रात
चंद्र21:3622:28रात
शनि22:2823:20रात
गुरु23:2000:12रात
मंगल00:1201:04रात
सूर्य01:0401:56रात
शुक्र01:5602:49रात
बुध02:4903:41रात
चंद्र03:4104:33रात
शनि04:3305:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2419° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।