11 अगस्त 2027 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 11 अगस्त 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 अगस्त 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (00:59, 12 अग॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (09:14 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 12:11 से 13:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 18:47
रात 05:36 तक
तिथि
दशमी, 00:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 09:14 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अगस्त 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 00:59, 12 अग॰ तक
शुक्ल एकादशी 03:00, 13 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:34, 12 अग॰ तक
योग
इंद्र 20:05 तक
वैधृतिअशुभ 20:38, 12 अग॰ तक
करण
तैतिल 12:09 तक
गर 00:59, 12 अग॰ तक
वणिज 13:56, 12 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
14:34
चंद्रास्त
00:05
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:11 – 13:50
यमगंड
07:14 – 08:53
गुलिक काल
10:32 – 12:11

11 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:35 – 07:14शुभ
अमृत07:14 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:32टालें
शुभ10:32 – 12:11शुभ
रोग12:11 – 13:50टालें
उद्वेग13:50 – 15:29टालें
चर15:29 – 17:08सामान्य
लाभ17:08 – 18:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:47 – 20:08टालें
शुभ20:08 – 21:29शुभ
अमृत21:29 – 22:50शुभ
चर22:50 – 00:11सामान्य
रोग00:11 – 01:32टालें
काल01:32 – 02:53टालें
लाभ02:53 – 04:14शुभ
उद्वेग04:14 – 05:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3506:41दिन
चंद्र06:4107:47दिन
शनि07:4708:53दिन
गुरु08:5309:59दिन
मंगल09:5911:05दिन
सूर्य11:0512:11दिन
शुक्र12:1113:17दिन
बुध13:1714:23दिन
चंद्र14:2315:29दिन
शनि15:2916:35दिन
गुरु16:3517:41दिन
मंगल17:4118:47दिन
सूर्य18:4719:41रात
शुक्र19:4120:35रात
बुध20:3521:29रात
चंद्र21:2922:23रात
शनि22:2323:17रात
गुरु23:1700:11रात
मंगल00:1101:05रात
सूर्य01:0501:59रात
शुक्र01:5902:53रात
बुध02:5303:47रात
चंद्र03:4704:42रात
शनि04:4205:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2427° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।