13 दिसंबर 2027 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 13 दिसंबर 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 13 दिसंबर 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (21:38 तक), नक्षत्र रोहिणी (15:14 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:14 पर है। राहुकाल 08:04 से 09:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:14
रात 06:46 तक
तिथि
पूर्णिमा, 21:38 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रोहिणी, 15:14 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 21:38 तक
कृष्ण प्रतिपदा 19:01, 14 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:14 तक
मृगशिरा 13:25, 14 दिस॰ तक
योग
साध्य 20:06 तक
शुभ 16:46, 14 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:50 तक
बव 21:38 तक
बालव 08:22, 14 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 02:22, 14 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:14
चंद्रोदय
16:49
चंद्रास्त
06:17
दिनमान
10h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:04 – 09:22
यमगंड
10:41 – 12:00
गुलिक काल
13:18 – 14:37

13 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:45 – 08:04शुभ
काल08:04 – 09:22टालें
शुभ09:22 – 10:41शुभ
रोग10:41 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:18टालें
चर13:18 – 14:37सामान्य
लाभ14:37 – 15:55शुभ
अमृत15:55 – 17:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:14 – 18:55सामान्य
रोग18:55 – 20:37टालें
काल20:37 – 22:18टालें
लाभ22:18 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:23शुभ
अमृत03:23 – 05:04शुभ
चर05:04 – 06:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4507:38दिन
शनि07:3808:30दिन
गुरु08:3009:22दिन
मंगल09:2210:15दिन
सूर्य10:1511:07दिन
शुक्र11:0712:00दिन
बुध12:0012:52दिन
चंद्र12:5213:44दिन
शनि13:4414:37दिन
गुरु14:3715:29दिन
मंगल15:2916:22दिन
सूर्य16:2217:14दिन
शुक्र17:1418:22रात
बुध18:2219:29रात
चंद्र19:2920:37रात
शनि20:3721:45रात
गुरु21:4522:52रात
मंगल22:5200:00रात
सूर्य00:0001:08रात
शुक्र01:0802:15रात
बुध02:1503:23रात
चंद्र03:2304:31रात
शनि04:3105:38रात
गुरु05:3806:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2475° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।