4 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 4 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (15:29 तक), नक्षत्र स्वाति (01:45, 5 जून तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:57 पर है। राहुकाल 17:14 से 18:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:57
रात 05:12 तक
तिथि
द्वादशी, 15:29 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
स्वाति, 01:45 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जून 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 15:29 तक
शुक्ल त्रयोदशी 13:49, 5 जून तक
नक्षत्र
स्वाति 01:45, 5 जून तक
विशाखा 01:00, 6 जून तक
योग
वरीयान 08:53 तक
परिघअशुभ 06:24, 5 जून तक
करण
बालव 15:29 तक
कौलव 02:37, 5 जून तक
तैतिल 13:49, 5 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:57
चंद्रोदय
16:12
चंद्रास्त
02:26
दिनमान
13h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
17:14 – 18:57
यमगंड
12:04 – 13:47
गुलिक काल
15:30 – 17:14

4 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:12 – 06:55टालें
चर06:55 – 08:38सामान्य
लाभ08:38 – 10:21शुभ
अमृत10:21 – 12:04शुभ
काल12:04 – 13:47टालें
शुभ13:47 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 17:14टालें
उद्वेग17:14 – 18:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:57 – 20:14शुभ
अमृत20:14 – 21:30शुभ
चर21:30 – 22:47सामान्य
रोग22:47 – 00:04टालें
काल00:04 – 01:21टालें
लाभ01:21 – 02:38शुभ
उद्वेग02:38 – 03:55टालें
शुभ03:55 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1206:20दिन
शुक्र06:2007:29दिन
बुध07:2908:38दिन
चंद्र08:3809:47दिन
शनि09:4710:55दिन
गुरु10:5512:04दिन
मंगल12:0413:13दिन
सूर्य13:1314:22दिन
शुक्र14:2215:30दिन
बुध15:3016:39दिन
चंद्र16:3917:48दिन
शनि17:4818:57दिन
गुरु18:5719:48रात
मंगल19:4820:39रात
सूर्य20:3921:30रात
शुक्र21:3022:22रात
बुध22:2223:13रात
चंद्र23:1300:04रात
शनि00:0400:55रात
गुरु00:5501:47रात
मंगल01:4702:38रात
सूर्य02:3803:29रात
शुक्र03:2904:20रात
बुध04:2005:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2541° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।