2 जुलाई 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 2 जुलाई 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 जुलाई 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (00:04, 3 जुल॰ तक), नक्षत्र स्वाति (07:53 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:16 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 17:20 से 19:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:16 – 19:04
रात 05:16 तक
तिथि
एकादशी, 00:04 तक
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जुलाई 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 00:04, 3 जुल॰ तक
शुक्ल द्वादशी 23:17, 3 जुल॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 07:53 तक
विशाखा 07:35, 3 जुल॰ तक
योग
सिद्ध 13:41 तक
साध्य 11:53, 3 जुल॰ तक
करण
वणिज 12:36 तक
विष्टि (भद्रा) 00:04, 3 जुल॰ तक
बव 11:37, 3 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 01:37, 3 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:16
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
15:07
चंद्रास्त
01:07
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
17:20 – 19:04
यमगंड
12:10 – 13:53
गुलिक काल
15:37 – 17:20

2 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:16 – 06:59टालें
चर06:59 – 08:43सामान्य
लाभ08:43 – 10:26शुभ
अमृत10:26 – 12:10शुभ
काल12:10 – 13:53टालें
शुभ13:53 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 17:20टालें
उद्वेग17:20 – 19:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:04 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:37शुभ
चर21:37 – 22:53सामान्य
रोग22:53 – 00:10टालें
काल00:10 – 01:27टालें
लाभ01:27 – 02:43शुभ
उद्वेग02:43 – 04:00टालें
शुभ04:00 – 05:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1606:25दिन
शुक्र06:2507:34दिन
बुध07:3408:43दिन
चंद्र08:4309:52दिन
शनि09:5211:01दिन
गुरु11:0112:10दिन
मंगल12:1013:19दिन
सूर्य13:1914:28दिन
शुक्र14:2815:37दिन
बुध15:3716:46दिन
चंद्र16:4617:55दिन
शनि17:5519:04दिन
गुरु19:0419:55रात
मंगल19:5520:46रात
सूर्य20:4621:37रात
शुक्र21:3722:28रात
बुध22:2823:19रात
चंद्र23:1900:10रात
शनि00:1001:01रात
गुरु01:0101:52रात
मंगल01:5202:43रात
सूर्य02:4303:34रात
शुक्र03:3404:25रात
बुध04:2505:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2552° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।