30 जुलाई 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 30 जुलाई 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 30 जुलाई 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (09:20 तक), नक्षत्र विशाखा (13:04 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 17:14 से 18:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 18:55
रात 05:30 तक
तिथि
नवमी, 09:20 तक
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 13:04 तक
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जुलाई 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 09:20 तक
शुक्ल दशमी 08:49, 31 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 13:04 तक
अनुराधा 13:22, 31 जुल॰ तक
योग
शुक्ल 18:33 तक
ब्रह्म 17:18, 31 जुल॰ तक
करण
कौलव 09:20 तक
तैतिल 21:01 तक
गर 08:49, 31 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 07:04 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
14:04
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
17:14 – 18:55
यमगंड
12:12 – 13:53
गुलिक काल
15:33 – 17:14

30 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:29 – 07:10टालें
चर07:10 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:31शुभ
अमृत10:31 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:53टालें
शुभ13:53 – 15:33शुभ
रोग15:33 – 17:14टालें
उद्वेग17:14 – 18:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:55 – 20:14शुभ
अमृत20:14 – 21:33शुभ
चर21:33 – 22:53सामान्य
रोग22:53 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:32टालें
लाभ01:32 – 02:51शुभ
उद्वेग02:51 – 04:10टालें
शुभ04:10 – 05:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2906:36दिन
शुक्र06:3607:44दिन
बुध07:4408:51दिन
चंद्र08:5109:58दिन
शनि09:5811:05दिन
गुरु11:0512:12दिन
मंगल12:1213:19दिन
सूर्य13:1914:26दिन
शुक्र14:2615:33दिन
बुध15:3316:40दिन
चंद्र16:4017:48दिन
शनि17:4818:55दिन
गुरु18:5519:48रात
मंगल19:4820:41रात
सूर्य20:4121:33रात
शुक्र21:3322:26रात
बुध22:2623:19रात
चंद्र23:1900:12रात
शनि00:1201:05रात
गुरु01:0501:58रात
मंगल01:5802:51रात
सूर्य02:5103:44रात
शुक्र03:4404:37रात
बुध04:3705:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2563° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।