6 दिसंबर 2028 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 6 दिसंबर 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 6 दिसंबर 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (03:38, 7 दिस॰ तक), नक्षत्र पुष्य (19:59 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 11:57 से 13:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 17:12
रात 06:42 तक
तिथि
पंचमी, 03:38 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुष्य, 19:59 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 03:38, 7 दिस॰ तक
कृष्ण षष्ठी 02:00, 8 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 19:59 तक
आश्लेषा 19:06, 7 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 13:21 तक
इंद्र 10:58, 7 दिस॰ तक
करण
कौलव 16:21 तक
तैतिल 03:38, 7 दिस॰ तक
गर 14:51, 7 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
21:26
चंद्रास्त
10:08
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:18 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:57 – 13:16
यमगंड
08:00 – 09:19
गुलिक काल
10:38 – 11:57

6 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:41 – 08:00शुभ
अमृत08:00 – 09:19शुभ
काल09:19 – 10:38टालें
शुभ10:38 – 11:57शुभ
रोग11:57 – 13:16टालें
उद्वेग13:16 – 14:35टालें
चर14:35 – 15:54सामान्य
लाभ15:54 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:12 – 18:54टालें
शुभ18:54 – 20:35शुभ
अमृत20:35 – 22:16शुभ
चर22:16 – 23:57सामान्य
रोग23:57 – 01:38टालें
काल01:38 – 03:19टालें
लाभ03:19 – 05:01शुभ
उद्वेग05:01 – 06:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4107:34दिन
चंद्र07:3408:26दिन
शनि08:2609:19दिन
गुरु09:1910:12दिन
मंगल10:1211:04दिन
सूर्य11:0411:57दिन
शुक्र11:5712:49दिन
बुध12:4913:42दिन
चंद्र13:4214:35दिन
शनि14:3515:27दिन
गुरु15:2716:20दिन
मंगल16:2017:12दिन
सूर्य17:1218:20रात
शुक्र18:2019:27रात
बुध19:2720:35रात
चंद्र20:3521:42रात
शनि21:4222:50रात
गुरु22:5023:57रात
मंगल23:5701:05रात
सूर्य01:0502:12रात
शुक्र02:1203:19रात
बुध03:1904:27रात
चंद्र04:2705:34रात
शनि05:3406:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2612° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।