14 दिसंबर 2028 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 14 दिसंबर 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 14 दिसंबर 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (10:50 तक), नक्षत्र विशाखा (08:53 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 13:19 से 14:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 17:15
रात 06:47 तक
तिथि
त्रयोदशी, 10:50 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 10:50 तक
कृष्ण चतुर्दशी 09:01, 15 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 08:53 तक
अनुराधा 07:43, 15 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 11:26 तक
धृति 08:44, 15 दिस॰ तक
करण
वणिज 10:50 तक
विष्टि (भद्रा) 21:53 तक
शकुनि 09:01, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
04:51
चंद्रास्त
15:33
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
13:19 – 14:37
यमगंड
06:46 – 08:05
गुलिक काल
09:23 – 10:42

14 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:46 – 08:05शुभ
रोग08:05 – 09:23टालें
उद्वेग09:23 – 10:42टालें
चर10:42 – 12:00सामान्य
लाभ12:00 – 13:19शुभ
अमृत13:19 – 14:37शुभ
काल14:37 – 15:56टालें
शुभ15:56 – 17:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:15 – 18:56शुभ
चर18:56 – 20:38सामान्य
रोग20:38 – 22:19टालें
काल22:19 – 00:01टालें
लाभ00:01 – 01:42शुभ
उद्वेग01:42 – 03:24टालें
शुभ03:24 – 05:05शुभ
अमृत05:05 – 06:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4607:39दिन
मंगल07:3908:31दिन
सूर्य08:3109:23दिन
शुक्र09:2310:16दिन
बुध10:1611:08दिन
चंद्र11:0812:00दिन
शनि12:0012:53दिन
गुरु12:5313:45दिन
मंगल13:4514:37दिन
सूर्य14:3715:30दिन
शुक्र15:3016:22दिन
बुध16:2217:15दिन
चंद्र17:1518:22रात
शनि18:2219:30रात
गुरु19:3020:38रात
मंगल20:3821:45रात
सूर्य21:4522:53रात
शुक्र22:5300:01रात
बुध00:0101:08रात
चंद्र01:0802:16रात
शनि02:1603:24रात
गुरु03:2404:32रात
मंगल04:3205:39रात
सूर्य05:3906:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2615° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।