5 फ़रवरी 2029 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 5 फ़रवरी 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 5 फ़रवरी 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (16:15 तक), नक्षत्र स्वाति (22:00 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 08:12 से 09:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 17:51
रात 06:48 तक
तिथि
सप्तमी, 16:15 तक
अष्टमी
नक्षत्र
स्वाति, 22:00 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 16:15 तक
कृष्ण अष्टमी 14:35, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 22:00 तक
विशाखा 21:08, 6 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 22:42 तक
वृद्धि 20:15, 6 फ़र॰ तक
करण
बव 16:15 तक
बालव 03:22, 6 फ़र॰ तक
कौलव 14:36, 6 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:38
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
08:12 – 09:34
यमगंड
10:57 – 12:20
गुलिक काल
13:43 – 15:05

5 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:49 – 08:12शुभ
काल08:12 – 09:34टालें
शुभ09:34 – 10:57शुभ
रोग10:57 – 12:20टालें
उद्वेग12:20 – 13:43टालें
चर13:43 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:28शुभ
अमृत16:28 – 17:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:51 – 19:28सामान्य
रोग19:28 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 01:57टालें
शुभ01:57 – 03:34शुभ
अमृत03:34 – 05:11शुभ
चर05:11 – 06:48सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4907:44दिन
शनि07:4408:39दिन
गुरु08:3909:34दिन
मंगल09:3410:30दिन
सूर्य10:3011:25दिन
शुक्र11:2512:20दिन
बुध12:2013:15दिन
चंद्र13:1514:10दिन
शनि14:1015:05दिन
गुरु15:0516:00दिन
मंगल16:0016:56दिन
सूर्य16:5617:51दिन
शुक्र17:5118:56रात
बुध18:5620:00रात
चंद्र20:0021:05रात
शनि21:0522:10रात
गुरु22:1023:15रात
मंगल23:1500:20रात
सूर्य00:2001:24रात
शुक्र01:2402:29रात
बुध02:2903:34रात
चंद्र03:3404:39रात
शनि04:3905:43रात
गुरु05:4306:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2635° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।