22 मार्च 2029 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 22 मार्च 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 मार्च 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (00:43, 23 मार्च तक), नक्षत्र रोहिणी (07:43 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 13:44 से 15:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:18
रात 06:06 तक
तिथि
सप्तमी, 00:43 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मार्च 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 00:43, 23 मार्च तक
शुक्ल अष्टमी 01:10, 24 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:43 तक
मृगशिरा 09:14, 23 मार्च तक
योग
आयुष्मान 00:05, 23 मार्च तक
सौभाग्य 23:22, 23 मार्च तक
करण
गर 12:13 तक
वणिज 00:43, 23 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 13:03, 23 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:33 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
10:24
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
अधिक चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
13:44 – 15:15
यमगंड
06:08 – 07:39
गुलिक काल
09:10 – 10:41

22 मार्च 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:39शुभ
रोग07:39 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:41टालें
चर10:41 – 12:13सामान्य
लाभ12:13 – 13:44शुभ
अमृत13:44 – 15:15शुभ
काल15:15 – 16:47टालें
शुभ16:47 – 18:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:18 – 19:47शुभ
चर19:47 – 21:15सामान्य
रोग21:15 – 22:44टालें
काल22:44 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 01:41शुभ
उद्वेग01:41 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:38शुभ
अमृत04:38 – 06:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:08दिन
मंगल07:0808:09दिन
सूर्य08:0909:10दिन
शुक्र09:1010:11दिन
बुध10:1111:12दिन
चंद्र11:1212:13दिन
शनि12:1313:14दिन
गुरु13:1414:14दिन
मंगल14:1415:15दिन
सूर्य15:1516:16दिन
शुक्र16:1617:17दिन
बुध17:1718:18दिन
चंद्र18:1819:17रात
शनि19:1720:16रात
गुरु20:1621:15रात
मंगल21:1522:14रात
सूर्य22:1423:13रात
शुक्र23:1300:12रात
बुध00:1201:11रात
चंद्र01:1102:10रात
शनि02:1003:09रात
गुरु03:0904:08रात
मंगल04:0805:07रात
सूर्य05:0706:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 मार्च 2029अधिक चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 अप्रैल 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अप्रैल 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अप्रैल 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 अप्रैल 2029अधिक चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2029मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैल 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2652° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।