20 जून 2029 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 20 जून 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 जून 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (23:51 तक), नक्षत्र हस्त (23:42 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 12:07 से 13:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 19:02
रात 05:13 तक
तिथि
नवमी, 23:51 तक
दशमी
नक्षत्र
हस्त, 23:42 तक
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जून 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 23:51 तक
शुक्ल दशमी 21:16, 21 जून तक
नक्षत्र
हस्त 23:42 तक
चित्रा 21:54, 21 जून तक
योग
वरीयान 01:38, 21 जून तक
परिघअशुभ 22:28, 21 जून तक
करण
बालव 13:06 तक
कौलव 23:51 तक
तैतिल 10:35, 21 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
13:03
चंद्रास्त
00:04
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:07 – 13:51
यमगंड
06:56 – 08:40
गुलिक काल
10:24 – 12:07

20 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:12 – 06:56शुभ
अमृत06:56 – 08:40शुभ
काल08:40 – 10:24टालें
शुभ10:24 – 12:07शुभ
रोग12:07 – 13:51टालें
उद्वेग13:51 – 15:35टालें
चर15:35 – 17:19सामान्य
लाभ17:19 – 19:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:02 – 20:19टालें
शुभ20:19 – 21:35शुभ
अमृत21:35 – 22:51शुभ
चर22:51 – 00:07सामान्य
रोग00:07 – 01:24टालें
काल01:24 – 02:40टालें
लाभ02:40 – 03:56शुभ
उद्वेग03:56 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1206:22दिन
चंद्र06:2207:31दिन
शनि07:3108:40दिन
गुरु08:4009:49दिन
मंगल09:4910:58दिन
सूर्य10:5812:07दिन
शुक्र12:0713:16दिन
बुध13:1614:26दिन
चंद्र14:2615:35दिन
शनि15:3516:44दिन
गुरु16:4417:53दिन
मंगल17:5319:02दिन
सूर्य19:0219:53रात
शुक्र19:5320:44रात
बुध20:4421:35रात
चंद्र21:3522:26रात
शनि22:2623:17रात
गुरु23:1700:07रात
मंगल00:0700:58रात
सूर्य00:5801:49रात
शुक्र01:4902:40रात
बुध02:4003:31रात
चंद्र03:3104:22रात
शनि04:2205:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2687° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।