30 जून 2029 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 30 जून 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 30 जून 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (05:59 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (14:23 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:15 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 08:42 से 10:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:15 – 19:04
रात 05:16 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 14:23 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जून 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 05:59 तक
कृष्ण पंचमी 06:53, 1 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 16:08, 1 जुल॰ तक
योग
प्रीति 00:01, 1 जुल॰ तक
आयुष्मान 00:07, 2 जुल॰ तक
करण
बालव 05:59 तक
कौलव 18:21 तक
तैतिल 06:53, 1 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:15
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
22:01
चंद्रास्त
09:10
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
08:42 – 10:26
यमगंड
13:53 – 15:36
गुलिक काल
05:15 – 06:59

30 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:15 – 06:59टालें
शुभ06:59 – 08:42शुभ
रोग08:42 – 10:26टालें
उद्वेग10:26 – 12:09टालें
चर12:09 – 13:53सामान्य
लाभ13:53 – 15:36शुभ
अमृत15:36 – 17:20शुभ
काल17:20 – 19:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:04 – 20:20शुभ
उद्वेग20:20 – 21:37टालें
शुभ21:37 – 22:53शुभ
अमृत22:53 – 00:10शुभ
चर00:10 – 01:26सामान्य
रोग01:26 – 02:43टालें
काल02:43 – 03:59टालें
लाभ03:59 – 05:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1506:24दिन
गुरु06:2407:33दिन
मंगल07:3308:42दिन
सूर्य08:4209:51दिन
शुक्र09:5111:00दिन
बुध11:0012:09दिन
चंद्र12:0913:18दिन
शनि13:1814:27दिन
गुरु14:2715:36दिन
मंगल15:3616:45दिन
सूर्य16:4517:55दिन
शुक्र17:5519:04दिन
बुध19:0419:55रात
चंद्र19:5520:46रात
शनि20:4621:37रात
गुरु21:3722:28रात
मंगल22:2823:19रात
सूर्य23:1900:10रात
शुक्र00:1001:01रात
बुध01:0101:52रात
चंद्र01:5202:43रात
शनि02:4303:34रात
गुरु03:3404:25रात
मंगल04:2505:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2691° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।