9 जुलाई 2029 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 9 जुलाई 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 जुलाई 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (21:23 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:44 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:19 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 07:02 से 08:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:19 – 19:03
रात 05:19 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:23 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 09:44 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 जुलाई 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 21:23 तक
कृष्ण चतुर्दशी 21:39, 10 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:44 तक
मृगशिरा 10:58, 10 जुल॰ तक
योग
वृद्धि 04:00, 10 जुल॰ तक
ध्रुव 03:07, 11 जुल॰ तक
करण
गर 09:01 तक
वणिज 21:23 तक
विष्टि (भद्रा) 09:35, 10 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 22:25 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:19
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
02:55
चंद्रास्त
17:10
दिनमान
13h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:57 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
07:02 – 08:45
यमगंड
10:28 – 12:11
गुलिक काल
13:54 – 15:37

9 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:19 – 07:02शुभ
काल07:02 – 08:45टालें
शुभ08:45 – 10:28शुभ
रोग10:28 – 12:11टालें
उद्वेग12:11 – 13:54टालें
चर13:54 – 15:37सामान्य
लाभ15:37 – 17:20शुभ
अमृत17:20 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:03 – 20:20सामान्य
रोग20:20 – 21:37टालें
काल21:37 – 22:54टालें
लाभ22:54 – 00:11शुभ
उद्वेग00:11 – 01:28टालें
शुभ01:28 – 02:45शुभ
अमृत02:45 – 04:02शुभ
चर04:02 – 05:19सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1906:27दिन
शनि06:2707:36दिन
गुरु07:3608:45दिन
मंगल08:4509:54दिन
सूर्य09:5411:02दिन
शुक्र11:0212:11दिन
बुध12:1113:20दिन
चंद्र13:2014:28दिन
शनि14:2815:37दिन
गुरु15:3716:46दिन
मंगल16:4617:54दिन
सूर्य17:5419:03दिन
शुक्र19:0319:54रात
बुध19:5420:46रात
चंद्र20:4621:37रात
शनि21:3722:28रात
गुरु22:2823:20रात
मंगल23:2000:11रात
सूर्य00:1101:02रात
शुक्र01:0201:54रात
बुध01:5402:45रात
चंद्र02:4503:37रात
शनि03:3704:28रात
गुरु04:2805:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2694° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।