14 जुलाई 2029 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 14 जुलाई 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 14 जुलाई 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (17:33 तक), नक्षत्र आश्लेषा (10:32 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 08:46 से 10:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 19:02
रात 05:22 तक
तिथि
तृतीया, 17:33 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
आश्लेषा, 10:32 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जुलाई 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 17:33 तक
शुक्ल चतुर्थी 15:36, 15 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 09:27, 15 जुल॰ तक
योग
सिद्धि 19:29 तक
व्यतीपातअशुभ 16:51, 15 जुल॰ तक
करण
तैतिल 06:25 तक
गर 17:33 तक
वणिज 04:37, 15 जुल॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:36, 15 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 10:32 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
07:52
चंद्रास्त
20:52
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
08:46 – 10:29
यमगंड
13:54 – 15:37
गुलिक काल
05:21 – 07:04

14 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:21 – 07:04टालें
शुभ07:04 – 08:46शुभ
रोग08:46 – 10:29टालें
उद्वेग10:29 – 12:12टालें
चर12:12 – 13:54सामान्य
लाभ13:54 – 15:37शुभ
अमृत15:37 – 17:19शुभ
काल17:19 – 19:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:02 – 20:19शुभ
उद्वेग20:19 – 21:37टालें
शुभ21:37 – 22:54शुभ
अमृत22:54 – 00:12शुभ
चर00:12 – 01:29सामान्य
रोग01:29 – 02:47टालें
काल02:47 – 04:04टालें
लाभ04:04 – 05:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2106:30दिन
गुरु06:3007:38दिन
मंगल07:3808:46दिन
सूर्य08:4609:55दिन
शुक्र09:5511:03दिन
बुध11:0312:12दिन
चंद्र12:1213:20दिन
शनि13:2014:28दिन
गुरु14:2815:37दिन
मंगल15:3716:45दिन
सूर्य16:4517:54दिन
शुक्र17:5419:02दिन
बुध19:0219:54रात
चंद्र19:5420:45रात
शनि20:4521:37रात
गुरु21:3722:28रात
मंगल22:2823:20रात
सूर्य23:2000:12रात
शुक्र00:1201:03रात
बुध01:0301:55रात
चंद्र01:5502:47रात
शनि02:4703:38रात
गुरु03:3804:30रात
मंगल04:3005:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2696° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।