30 अक्टूबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:54, 31 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुष्य (23:40 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 14:37 से 16:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 17:24
रात 06:15 तक
तिथि
अष्टमी, 04:54 तक
नवमी
नक्षत्र
पुष्य, 23:40 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:54, 31 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 04:03, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 23:40 तक
आश्लेषा 23:37, 31 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 12:16 तक
शुभ 10:55, 31 अक्टू॰ तक
करण
बालव 17:02 तक
कौलव 04:54, 31 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:35, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
23:50
चंद्रास्त
12:29
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
14:37 – 16:01
यमगंड
09:02 – 10:25
गुलिक काल
11:49 – 13:13

30 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:14 – 07:38टालें
उद्वेग07:38 – 09:02टालें
चर09:02 – 10:25सामान्य
लाभ10:25 – 11:49शुभ
अमृत11:49 – 13:13शुभ
काल13:13 – 14:37टालें
शुभ14:37 – 16:01शुभ
रोग16:01 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:24 – 19:01टालें
लाभ19:01 – 20:37शुभ
उद्वेग20:37 – 22:13टालें
शुभ22:13 – 23:50शुभ
अमृत23:50 – 01:26शुभ
चर01:26 – 03:02सामान्य
रोग03:02 – 04:38टालें
काल04:38 – 06:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1407:10दिन
सूर्य07:1008:06दिन
शुक्र08:0609:02दिन
बुध09:0209:57दिन
चंद्र09:5710:53दिन
शनि10:5311:49दिन
गुरु11:4912:45दिन
मंगल12:4513:41दिन
सूर्य13:4114:37दिन
शुक्र14:3715:33दिन
बुध15:3316:28दिन
चंद्र16:2817:24दिन
शनि17:2418:29रात
गुरु18:2919:33रात
मंगल19:3320:37रात
सूर्य20:3721:41रात
शुक्र21:4122:45रात
बुध22:4523:50रात
चंद्र23:5000:54रात
शनि00:5401:58रात
गुरु01:5803:02रात
मंगल03:0204:06रात
सूर्य04:0605:11रात
शुक्र05:1106:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2737° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।