4 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 4 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 4 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (23:47 तक), नक्षत्र विशाखा (18:33 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 14:34 से 15:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:12
रात 06:40 तक
तिथि
चतुर्दशी, 23:47 तक
अमावस्या
नक्षत्र
विशाखा, 18:33 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 23:47 तक
अमावस्या 20:22, 5 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 18:33 तक
अनुराधा 15:51, 5 दिस॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 15:59 तक
सुकर्मा 11:55, 5 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:31 तक
शकुनि 23:47 तक
चतुष्पद 10:03, 5 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 13:15 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
05:01
चंद्रास्त
15:56
दिनमान
10h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
14:34 – 15:53
यमगंड
09:18 – 10:37
गुलिक काल
11:56 – 13:15

4 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:39 – 07:59टालें
उद्वेग07:59 – 09:18टालें
चर09:18 – 10:37सामान्य
लाभ10:37 – 11:56शुभ
अमृत11:56 – 13:15शुभ
काल13:15 – 14:34टालें
शुभ14:34 – 15:53शुभ
रोग15:53 – 17:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:12 – 18:53टालें
लाभ18:53 – 20:34शुभ
उद्वेग20:34 – 22:15टालें
शुभ22:15 – 23:56शुभ
अमृत23:56 – 01:37शुभ
चर01:37 – 03:18सामान्य
रोग03:18 – 04:59टालें
काल04:59 – 06:40टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3907:32दिन
सूर्य07:3208:25दिन
शुक्र08:2509:18दिन
बुध09:1810:10दिन
चंद्र10:1011:03दिन
शनि11:0311:56दिन
गुरु11:5612:49दिन
मंगल12:4913:41दिन
सूर्य13:4114:34दिन
शुक्र14:3415:27दिन
बुध15:2716:19दिन
चंद्र16:1917:12दिन
शनि17:1218:20रात
गुरु18:2019:27रात
मंगल19:2720:34रात
सूर्य20:3421:42रात
शुक्र21:4222:49रात
बुध22:4923:56रात
चंद्र23:5601:04रात
शनि01:0402:11रात
गुरु02:1103:18रात
मंगल03:1804:26रात
सूर्य04:2605:33रात
शुक्र05:3306:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2751° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।